भास्कर न्यूज | लुधियाना माघ मास की पावन वेला में आज लुधियाना महानगर आस्था के एक अनूठे और अलौकिक रंग में रंगा नजर आएगा। आज 18 जनवरी को मौन की आंतरिक शक्ति और सूर्य की बाहरी आभा का मिलन भक्तों के अंतर्मन को आलोकित करने जा रहा है। वर्ष 2026 की यह पहली मौनी अमावस्या अपने साथ रवि-मौनी अमावस्या का वह दुर्लभ संयोग लेकर आई है, जो ज्योतिषीय गणना के अनुसार सदियों में एक बार निर्मित होता है। धर्मगुरु पं अजय विशिष्ट ने इस विशेष दिन की महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज का दिन केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि देवताओं के लिए भी अत्यंत पावन है। शास्त्रों में वर्णित है कि माघ अमावस्या के दिन स्वर्ग की समस्त शक्तियां पवित्र नदियों के जल में वास करती हैं। पं अजय विशिष्ट के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि आज के दिन स्वयं भगवान विष्णु और अन्य देवी-देवता मानवीय रूप में या सूक्ष्म रूप में आकर गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यही कारण है कि आज नदियों का जल अमृत तुल्य हो जाता है। इस वर्ष की मौनी अमावस्या आध्यात्मिक ऊर्जा का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। पंडित ने जानकारी दी कि आज पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का प्रभाव रहेगा। यह योग मानवीय संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने का सामर्थ्य रखता है। इस विशेष कालखंड में की गई मौन साधना जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाली मानी जा रही है। यह योग विशेष रूप से उन लोगों के लिए संजीवनी के समान है, जो लंबे समय से पारिवारिक क्लेश या मानसिक अशांति के भंवर में फंसे हैं। यद्यपि यह अमावस्या पंचक के प्रभाव में है लेकिन पंडित के अनुसार स्नान, दान और तर्पण जैसे शुभ कार्यों पर पंचक का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। शास्त्रों के अनुसार पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा या ईंधन इकट्ठा करना भले ही वर्जित हो, लेकिन पवित्र नदी में डुबकी लगाना और पितरों के निमित्त मौन रहकर दान करना अक्षय पुण्य प्रदान करता है। यह समय आत्म-साक्षात्कार और नई ऊर्जा के संचार के लिए सर्वश्रेष्ठ है। आज देश भर में प्रयागराज, कुरुक्षेत्र के ब्रह्म सरोवर और देश की अन्य पवित्र नदियों के किनारे मिनी कुंभ सा नजारा दिखाई देगा। जो श्रद्धालु गंगा तट पर नहीं पहुंच सकते वे घरों में ही जल में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। पंडित बताते हैं कि आज के दिन किया गया तिल, गुड़, गर्म वस्त्र और अनाज का दान स्वर्ण दान के समान पुण्यकारी है। आज पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा करने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


