स्वार्थ त्याग कर निष्काम कर्म की ओर बढ़ें, यही सच्ची ईश-भक्ति: शून्य प्रभु

भास्कर न्यूज | लुधियाना गोइंदवाल स्थित शनि गांव में शनिवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। साप्ताहिक आयोजन के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने शनि दरबार में शीश नवाया और तेल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं जिससे पूरा परिसर जय शनिदेव के जयकारों से गुंजायमान रहा। आध्यात्मिक गुरु शून्य प्रभु और मुख्य सेवादार कर्मजीत सिंह मान ने शनिदेव की विशेष आरती उतारी। उपस्थित संगत को संबोधित करते हुए शून्य प्रभु ने निष्काम कर्म की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला। प्रवचन के दौरान शून्य प्रभु ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि हर पूजा या कर्म हम अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए ही करें। उन्होंने गहराई से समझाते हुए कहा कि हमने अक्सर देखा है कि पूजा के बाद हम प्रभु से कुछ न कुछ मांग ही लेते हैं। कुछ नहीं तो सुख-शांति ही मांग लेते हैं जबकि सच्ची पूजा केवल प्रभु प्रेम के लिए होनी चाहिए उसमें कोई कामना नहीं होनी चाहिए। शून्य प्रभु ने मानवता का मार्मिक पाठ पढ़ाते हुए कहा कि जीवन में कुछ दान-पुण्य समाज और प्रकृति की भलाई के लिए भी करने चाहिए। उन्होंने कहा कि अपना पेट तो पशु-पक्षी भी भर लेते हैं परंतु इंसान को समस्त इंसानियत के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ कर्म पूरी तरह निष्काम भाव से करने चाहिए क्योंकि निस्वार्थ सेवा ही ईश्वर तक पहुँचने का वास्तविक मार्ग है। मंदिर प्रबंधन द्वारा भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। आरती के पश्चात समस्त संगत ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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