दक्षिणी राजस्थान में महिलाओं और बच्चियों पर सर्विक्स कैंसर का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर यहां तेजी से पैर पसार रहा है। उदयपुर में बीते एक साल में इस रोग के 4,509 नए मरीज सामने आ चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकार करोड़ों रुपए के बजट से मुफ्त दवा-जांच जैसी योजनाएं चला रही है, लेकिन बेटियों की सर्विक्स कैंसर से सुरक्षा करने वाली महज 300 से 500 रुपए की वैक्सीन सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र राठौड़ के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) है। देश में 90% मामले इसी वायरस की वजह से होते हैं। प्राइवेट अस्पतालों में इसकी वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर नहीं मिलती है। जागरूकता की कमी के कारण गरीब तबके की महिलाएं इस रोग का शिकार हो रही हैं। आरएनटी के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की कैंसर ओपीडी में पिछले साल 33750 मरीज आए थे। इनमें से करीब 8 हजार मरीज सर्विक्स कैंसर के थे। सर्विक्स कैंसर में समय पर वैक्सीन लगने से रोग को 80 फीसदी तक रोका जा सकता है। इसमें 9 से 14 वर्ष तक की उम्र में वैक्सीन की केवल 2 डोज की जरूरत रहती है। जबकि, 15 से 26 वर्ष उम्र वर्ग में वैक्सीन की 3 डोज लगाने की जरूरत होती है। आरएनटी में हर माह पहुंच रहे 300 नए रोगी आरएनटी मेडिकल कॉलेज के आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में कोई भी महीना ऐसा नहीं रहा जब मरीजों की संख्या 300 से कम रही हो। जुलाई (449) और अगस्त (417) में संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले देखे गए। जबकि, जनवरी माह में 387, फरवरी 334, मार्च 350, अप्रैल 363, मई 398, जून 379, सितंबर 353, अक्टूबर 327, नवंबर 359, दिसंबर 393 केस सामने आए थे। लक्षण : असामान्य ब्लीडिंग, सफेद पानी व पेल्विक एरिया में दर्द
इस रोग के लक्षणों में पीरियड्स के अलावा या संबंध बनाने के बाद असामान्य ब्लीडिंग, बदबूदार सफेद पानी आना और पेल्विक एरिया (पेट के निचले हिस्से) में लगातार दर्द रहना है। डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल कैंसर ऑब्जरवेटरी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में 1.27 लाख नए मरीज सामने आए थे। इस कैंसर से इसी वर्ष देश में 79 हजार 906 मरीजों की मौत हो चुकी है। अभी 3 लाख 70 हजार 106 मरीज इस बीमारी के साथ जी रहे हैं। वायरस शरीर में प्रवेश के 10 साल बाद बनता है कैंसर
एचपीवी वायरस शरीर में प्रवेश के 10 साल बाद कैंसर का रूप लेता है। यदि समय पर पेप स्मियर (पेप स्मियर) या एचपीवी टेस्ट करवा लिया जाए, तो इसे शुरुआती स्टेज में ही पकड़ा जा सकता है। सरकार ने बजट में इसे 2026 तक लागू करने की बात कही थी, लेकिन अभी तक कोई तैयारी नहीं है। अधिकांश सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से होते हैं। यह शारीरिक संपर्क से फैलता है। हालांकि, शरीर का इम्यून सिस्टम अक्सर इसे खत्म कर देता है, लेकिन कुछ मामलों में यह कोशिकाओं को कैंसर में बदल देता है। इस के उपजने के कारणों में कम उम्र में शादी या शारीरिक संबंध बनना, एक से अधिक पार्टनर, धूम्रपान, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी शामिल है। भास्कर एक्सपर्ट-सही उम्र में वैक्सीनेशन से जड़ से खत्म हो सकता है यह रोग यह कैंसर केवल जागरूकता के अभाव में फैल रहा है। डब्ल्यूएचओ ने भी इसे 2025 तक यूनिवर्सल वैक्सीनेशन में शामिल करने पर जोर दिया है। अगर बेटियों को सही उम्र में वैक्सीन लग जाए तो भविष्य में इस जानलेवा बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। पहली और दूसरी स्टेज पर रेडिएशन थैरेपी व सर्जरी से इसका उपचार किया जा सकता है। तीसरी और चौथी में रेडिएशन व कीमो थैरेपी से उपचार करना पड़ता है। -डॉ. नरेंद्र राठौड़, वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर


