सलूंबर में राष्ट्रीय आयुष मिशन और आयुर्वेद विभाग के संयुक्त देखरेख में आयोजित 10 दिवसीय निशुल्क आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर के चौथे दिन भी लोगों में आयुर्वेद के प्रति उत्साह देखा गया। शिविर में लगातार व्यापक जनभागीदारी दर्ज की जा रही है। शिविर के चौथे दिन गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) से पीड़ित 84 मरीजों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इन रोगों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग और थायरॉयड जैसी बीमारियां शामिल थीं। स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स ने पंचकर्म चिकित्सा, आयुर्वेदिक औषधियों और जीवनशैली में सुधार के माध्यम से इन रोगों का उपचार किया। शिविर की बहिरंग ओपीडी में कुल 320 मरीजों का उपचार किया गया, जबकि 132 मरीजों ने पंचकर्म चिकित्सा का लाभ उठाया। पंचकर्म के तहत स्नेहन से मांसपेशियों को मजबूती, स्वेदन से शरीर का शुद्धिकरण, कटी बस्ती से कमर दर्द का उपचार, जानू बस्ती से घुटनों की समस्या का समाधान और ग्रीवा बस्ती से गर्दन दर्द में राहत प्रदान की गई। शिविर में 6 मरीजों का अग्निकर्म भी किया गया, जो पुराने दर्द, सूजन और मांसपेशीय तनाव में प्रभावी माना जाता है। इसके अलावा, मौसमी बीमारियों से बचाव और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से 147 लोगों को निशुल्क आयुर्वेदिक क्वाथ पिलाया गया। शिविर की सफलता में डॉक्टर्स के साथ-साथ आयुर्वेद कंपाउंडर और नर्सिंग स्टाफ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सेवा कार्यों में प्रदीप कुमार व्यास, रामलाल मीणा, शंकरलाल मीणा, शंकरलाल खराड़ी, किरण कुमार गर्ग, दिनेश कुमार चौबीस, कन्हैयालाल नागदा, चंद्रेश परमार, महावीर कुमार सालवी, भेरूलाल मीणा, विपुल कुमार, प्रभुलाल डामोर, प्रकाश मड्डा, ललित कुमार कलाल, मंजू कुमारी मेघवाल, विष्णु अहारी, राजकुमारी खराड़ी और मीनाक्षी सालवी ने अपनी सेवाएं दीं। महावीर इंटरनेशनल द्वारा शिविर में मरीजों के परिजनों के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई। शिविर के दौरान डॉ. जितेंद्र जोशी (सहायक नोडल अधिकारी, जिला सलूंबर) और डॉ. अख्तर हुसैन (शिविर प्रभारी) उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों को जन-जन तक पहुंचाना है, और यह शिविर अपने उद्देश्य में सफल रहा है।


