जालंधर| सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर अक्सर सवाल उठते हैं, लेकिन सिविल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने एक नामुमकिन लगने वाले केस को मुमकिन कर दिखाया है। जहर (सल्फास) का सेवन करने वाली एक 27 वर्षीय युवती को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। सल्फास खाने से 27 साल की युवती गंभीर हालत में सिविल अस्पताल में 19 जनवरी को इलाज को दाखिल किया था। सल्फास का जहर शरीर में फैल चुका था, जिससे युवती की जान पर बन आई थी। आमतौर पर ऐसे क्रिटिकल मामलों को तुरंत चंडीगढ़ या एम्स दिल्ली रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि इनमें जीवित बचने की संभावना न के बराबर होती है, लेकिन युवती का मेडिसिन की टीम ने सफल इलाज किया। इस टीम ने एमएस डा. नमिता घई की देखरेख में काम किया। इस कामयाबी पर मेडिसिन विभाग के डॉ. अभिनव शूर और डा. तरसेम लाल ने बताया कि अस्पताल में अनुभवी डॉक्टरों की टीम हर संभव प्रयास करती है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले नवंबर में भी इसी तरह का एक अत्यंत गंभीर मरीज अस्पताल आया था, जिसका सफल इलाज कर उसे नई जिंदगी दी गई थी।


