करौली में सवर्ण समाज ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में जिला कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। सैकड़ों लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने 1 फरवरी को भारत बंद का आह्वान भी किया। सवर्ण समाज के सदस्यों ने पुरानी नगर पालिका क्षेत्र से एक रैली निकाली। यह रैली फूटाकोटा, बड़ा बाजार, वजीरपुर गेट और पुरानी कलेक्ट्रेट चौराहे से होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। यहां प्रदर्शनकारियों ने लगभग आधे घंटे तक सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जनवरी 2026 में लागू किए गए UGC के नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के नाम पर एकतरफा व्यवस्था थोपते हैं। उनका दावा है कि ये नियम केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दिव्यांग छात्रों पर केंद्रित हैं, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी हो रही है। वक्ताओं ने नियमों के तहत गठित की जाने वाली इक्विटी कमेटियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन कमेटियों को बिना किसी दंडात्मक प्रावधान के जांच का अधिकार देना, झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों को बढ़ावा दे सकता है, जिससे शैक्षणिक परिसरों में भय और असंतोष का माहौल बन रहा है। प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि देश की एक बड़ी आबादी सामान्य वर्ग से संबंधित है, और इस तरह की नीतियां उनके समान अवसर के अधिकार को कमजोर करती हैं। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी कानून का उद्देश्य सभी वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि सामाजिक संतुलन को बिगाड़ना। धरना स्थल पर विरोध के प्रतीक के रूप में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया और सरकार से “सद्बुद्धि” देने की प्रार्थना की गई। इसके उपरांत, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें UGC नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इन नियमों को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने 1 फरवरी को भारत बंद के माध्यम से देशव्यापी विरोध दर्ज कराने की बात दोहराई।


