नवा रायपुर में पदस्थ ट्रैफिक सिपाही मयंक खुंटे से एमपी खंडवा के पास लूट हो गई। सिपाही को जमीन में गड़ा सोना सस्ते में देने का झांसा देकर खंडवा बुलाया गया। सिपाही 17.50 लाख रुपए लेकर सोना खरीदने के लिए पहुंचा। वहां पारधी गिरोह ने उसके ऊपर कुल्हाड़ी व हंसिए से हमला हो गया। सिपाही का पैसा लूटकर भाग निकले। आरक्षक किसी तरह नजदीक के पुलिस स्टेशन में पहुंचकर मामले की जानकारी दी। पुलिस ने दो लुटेरों को पकड़ लिया है। उनसे 14 लाख रुपए जब्त किया गया है। सिपाही का एमपी में इलाज चल रहा है। सिपाही मयंक ने अधिकारियों से गाड़ी खरीदने के नाम पर छुट्टी ली थी। वह ड्यूटी से गैरहाजिर है। पुलिस ने बताया कि रायपुर निवासी मयंक खुंटे नवा रायपुर ट्रैफिक थाना में पदस्थ है। उसकी एक माह पहले पारधी गिरोह के सरगना युवराज पारधी से झारखंड में मुलाकात हुई थी। तब से उनके बीच बातचीत चल रही थी। युवराज ने झांसा दिया कि उसे गड़ा हुआ धन मिला है। हंड़े में एक किलो से ज्यादा का सोना है। उसे वह सस्ते में दे देगा। मयंक लालच में आया गया। उसने अपने साथियों से गाड़ी खरीदने के लिए उधार में 17.50 लाख रुपए लिया है। वह 28 अगस्त को छुट्टी लेकर साथियों के साथ एमपी निकल गया। वह 29 अगस्त को एमपी आशापुर पहुंचा। वहां पिपलोद का युवराज उर्फ सेवक राम और शबनम समेत चार लोग मिले। वहां ढाबा में भोजन किए। फिर 31 अगस्त की सुबह 7 बजे वह हरदा रोड पर तोरनिया सोलर प्लांट के पास पहुंचे। यहां आरोपियों ने आरक्षक और उसके साथियों पर हमला कर दिया। कुल्हाडी, हंसिया और डंडा से हमला किया। पैसा लूटकर भाग गए। पुलिस ने युवराज और शबनम को पकड़ लिया है। सैंपल मंगाकर सोना जांचा, फिर खरीदने गया
सिपाही मयंक ने एमपी पुलिस को बयान दिया है कि जुलाई में पारदी गैंग के सरगना युवराज सिंह की मुलाकात अजय परिहार से हुई थी। जहां युवराज ने गढ़े हुए सोने की जानकारी दी। अजय मयंक के भाई के दुकान में काम करता है। अजय ने गढ़े सोने की जानकारी मयंक के भाई को दी। फिर यह बात मयंक तक पहुंची। मयंक ने युवराज से बात किया और सैंपल मंगाया। युवराज ने असली सोना भेजा। मयंक ने सोने की जांच की, वह 24 कैरेट का असली सोना था। मयंक को भरोसा हो गया। इसलिए वह खरीदने गया था।


