केंद्र और राज्य सरकार की परिवहन नीतियों के विरोध में शनिवार को राजस्थान भर में निजी बस ऑपरेटरों की सांकेतिक हड़ताल देखने को मिली। बीकानेर में करीब 1500 निजी बसों का चक्का जाम रहा, जिससे लगभग 5000 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि वैवाहिक सीजन और परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए स्लीपर बसों को हड़ताल से बाहर रखा गया। निजी बसों के सड़कों से हटते ही रोडवेज बसों पर यात्रियों का दबाव बढ़ गया और अनुमान है कि रोडवेज का यात्री भार करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ा है। बीकानेर बस ऑपरेटर यूनियन और बस ऑपरेटर सोसायटी राजस्थान के आह्वान पर शनिवार को शहरी और ग्रामीण रूट पर चलने वाली निजी यात्री बसें नहीं चलीं। यूनियन अध्यक्ष समुद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि यह चक्का जाम पूरी तरह सांकेतिक था, जिसका उद्देश्य सरकार का ध्यान लंबे समय से लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना है। हड़ताल के कारण सुबह से ही बस स्टैंड और प्रमुख चौराहों पर यात्रियों की भीड़ नजर आई। कई यात्रियों को मजबूरन रोडवेज बसों, टैक्सियों या वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा। निजी बसें बंद रहने से छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने-जाने वाले यात्रियों को ज्यादा परेशानी हुई। राठौड़ ने बताया कि निजी बस ऑपरेटरों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम 15 सूत्रीय मांग पत्र पहले ही संबंधित जिला कलेक्टरों को सौंपा जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि समय रहते इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। निजी बसें बंद, रोडवेज पर बढ़ा दबाव निजी बसों की हड़ताल का सीधा असर रोडवेज परिवहन पर पड़ा। निजी बसें नहीं चलने के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने राजस्थान रोडवेज की बसों का रुख किया। हालांकि रोडवेज प्रशासन ने अतिरिक्त बसें चलाने का कोई औपचारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि निजी बसों की हड़ताल से रोडवेज का यात्री लोड करीब 20% तक बढ़ गया। इसकी वास्तविक गणना रविवार या सोमवार तक सामने आने की संभावना है। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निजी बसों की हड़ताल लंबी चली, तो रोडवेज पर संसाधनों का दबाव और बढ़ सकता है, जिससे समय पालन और सुविधा दोनों प्रभावित हो सकती हैं। 28 को जयपुर में बैठक, उससे पहले मांगे माने सरकार
“यह केवल सांकेतिक हड़ताल है। हम नहीं चाहते कि आमजन को परेशानी हो, इसलिए स्लीपर बसों को बाहर रखा गया। लेकिन यदि सरकार ने निजी बस ऑपरेटरों की जायज मांगों जैसे किराया पड़ोसी राज्यों के समान करना, ग्रामीण मार्गों का टैक्स माफ करना और ओवरलैप सीमा बढ़ाना पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। 28 जनवरी को जयपुर में प्रस्तावित बैठक में आगामी निर्णय लिए जाएंगे।”
-समुंद्र सिंह राठौड़, अध्यक्ष, बीकानेर बस ऑपरेटर यूनियन


