रांची की मेयर की कुर्सी पर बैठने की लड़ाई रोमांचक होती जा रही है। बुधवार को नामांकन खत्म होने तक कुल 19 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया है। इसमें 9 ऐसे उम्मीदवार हैं जो पहले कई चुनाव लड़ चुके हैं। जबकि, 10 ऐसे हैं, जो पहली बार किस्मत आजमाएंगे। मेयर की कुर्सी की लड़ाई में 3 प्रमुख राजनीतिक दलों में भाजपा-कांग्रेस ने सीधे तौर पर अपने प्रत्याशियों को समर्थन देने की घोषणा की है। झामुमो ने किसी के समर्थन की घोषणा नहीं की है। ऐसे में सीधा मुकाबला भाजपा समर्थित उम्मीदवार रोशनी खलखो और कांग्रेस की रमा खलखो के बीच माना जा रहा है। लेकिन चुनावी दंगल में जो 19 प्रत्याशी खड़े हुए हैं, उसमें दूसरे प्रत्याशी भी किसी से कम नहीं है। क्योंकि, कई प्रत्याशी रांची के जाने-पहचाने चेहरे हैं, जिन्हें पहले भी कई चुनाव लड़ने का अनुभव है। रमा खलखो जहां रांची की पहली मेयर रह चुकी है, वहीं रोशनी खलखो दो बार पार्षद रह चुकी हैं। भाजपा से जुड़े सुनील फकीरा ऐसे उम्मीदवार हैं जो संयुक्त बिहार में रांची नगर निगम बनने के बाद 1986 में हुए नगर निगम के चुनाव में पार्षद बने थे। इसके बाद उन्होंने हटिया-खिजरी विधानसभा का भी चुनाव लड़ा। प्रवीण कच्छप ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्होंने 2024 में रांची लोकसभा का चुनाव लड़ा है। देवी दयाल मुंडा 2009 में तमाड़ में तत्कालीन सीएम शिबू सोरेन के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वे 2013 में रांची के मेयर पद के लिए भी चुनाव लड़ चुके हैं। भाजपा से जुड़े संजय टोप्पो ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने 2008 में डिप्टी मेयर, 2013 में मेयर का चुनाव लड़ा था। इन प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने का पुराना अनुभव
1. रमा खलखो : कांग्रेस महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं। 2008 में नगर निगम के पहले चुनाव में जीत दर्ज करके मेयर बनी थी। 2013 के चुनाव में नोट कांड में नाम आने के बाद चुनाव नहीं लड़ी। इस बार फिर मेयर पद के लिए चुनाव लड़ रही है। 2. रोशनी खलखो : भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हैं। वर्ष 2013 और 2018 के नगर निगम चुनाव में पार्षद रह चुकी हैं। निकाय चुनाव नहीं होने के खिलाफ हाईकोर्ट में केस की थी। इसके बाद चुनाव की घोषणा हुई। अब सीधे मेयर पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं। 3. सुनील फकीरा : भाजपा से जुड़े हैं। 1986 में पहली बार नगर निगम चुनाव में पार्षद बने थे। इसके बाद 1990 में हटिया विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़े। इसके बाद 1995 में खिजरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े। अब पहली बार मेयर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। 4. संजय टोप्पो : भाजपा से जुड़े हैं। 2008 में डिप्टी मेयर का चुनाव लड़े थे। 2013 में मेयर पद के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं। 5. कथरीना तिर्की : झामुमो से जुड़ी हैं। 2008 में पार्षद का चुनाव लड़ चुकी हैं। 2018 में भी पार्षद के लिए लड़ीं। अब मेयर के लिए खड़ी हुई हैं। 6. प्रवीण कच्छप : संपूर्ण भारत क्रांति पार्टी से 2004 में रांची लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। अब मेयर का चुनाव लड़ रहे हैं। 7. देवी दयाल मुंडा : 2009 में तमाड़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। इसके बाद 2013 में मेयर पद के लिए चुनाव लड़े, लेकिन नोट कांड के बाद वोट रद्द कर दिया गया था। अब फिर मेयर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। 8. सुरेंद्र लिंडा : झामुमो से जुड़े हैं। 2008 में पार्षद के लिए चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए। इस बार मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। 9. सुजाता कच्छप : रांची के वार्ड नंबर-7 से लगातार तीन बार पार्षद रह चुकी हैं। क्षेत्र के लिए वह जाना-पहचाना चेहरा हैं। ये पहली बार चुनावी मैदान में: सोनू खलखो, राजेंद्र मुंडा, सुमनकांत तिग्गा, अजीत लकड़ा, किरण कुमारी, सुरेंद्र लिंडा, सुजीत कुमार कुजूर, रामशरण तिर्की, बिरू तिर्की, सुजीत विजय आनंद कुजूर।


