मंडीबामौरा | ठंड बढ़ते ही हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ गया है। ओपीडी में सीने में दर्द की शिकायत लेकर हर 300 मरीज में 250 शामिल हैं। हाथ में झुनझुनी, कंधे में दर्द जैसे लक्षण भी सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा खतरा मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को है। साइलेंट अटैक का खतरा सबसे ज्यादा मधुमेह के मरीजों को होता है। वहीं ठंड में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। हार्ट को ब्लड पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। सर्दी में खून गाढ़ा हो जाता है। इससे रक्त के थक्के बनने और धमनियों में रुकावट का खतरा बढ़ता है। व्यायाम नहीं करने से वजन और कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। पानी कम पीने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है। बिना दबाव के सांस लेने में तकलीफ, पीठ, कंधे, जबड़े में दर्द या खिंचाव, पेट में जलन या अपच, जी मिचलाना, उल्टी, चक्कर आना, अत्यधिक थकान, कमजोरी या ठंडा पसीना आने पर इसे नजरंदाज नहीं करना चाहिए। इसके लिए जरूरी है सुबह बाहर जाने से बचें। अंदर ही व्यायाम करें। गर्म कपड़े, टोपी, मोजे पहनें। दिनभर में थोड़ा-थोड़ा खाएं। पर्याप्त पानी पिएं। ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं। शराब से बचें, इससे हार्ट बीट बढ़ सकती है। समय पर दवा लेने, गर्म कपड़े पहनने और खुद को हाइड्रेटेड रखने की सलाह दे रहे हैं। शीतलहर के दौरान ज्यादा सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। खासकर छोटे बच्चांे और बुजुर्गों पर ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। तकलीफ होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।


