साइबर अपराध के गढ़ माने जाने वाले जामताड़ा जिले के करमाटांड़ की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। यहां के युवा अब खेती में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। यही नहीं कुछ किसान तो वैज्ञानिक तकनीक से खेती कर ना सिर्फ हर साल 10 लाख रुपए की आमदनी कर रहे हैं, बल्कि दूसरे को रोजगार देकर प्रेरणा के स्रोत भी बन रहे हैं। करमाटांड़ प्रखंड के रतनूडीह गांव निवासी टिकैत सिंह रोजगार के लिए खेती को चुना और 2 एकड़ से खेती की शुरूआत की, फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। धीरे-धीरे आमदनी बढ़ाने पर आज वो अपने लगभग 10 एकड़ जमीन पर न सिर्फ मौसमी सब्जी की खेती कर रहे हैं। बल्कि सैकड़ो फलदार पेड़ लगाकर बागवानी भी कर रहे हैं। किसान टिकैत ने बताया कि वह मुख्य रूप से शिमला मिर्च, हरी मिर्ची टमाटर, ब्रोकली की खेती करते हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है, उनकी मेहनत को देखते हुए कृषि विभाग ने उन्हें टपक प्रणाली तथा मल्चिंग विधि से खेती करने की तकनीक उपलब्ध कराई गई है। जिससे वो कम खर्चे में ज्यादा आमदनी कर रहे है। 1 एकड़ में लगाया शिमला मिर्च : करमाटांड़ के रतनूडीह गांव में पथरीली जमीन पर किसान टिकैत सिंह ने शिमला मिर्च की खेती का मिसाल कायम की और दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हैं। 1 एकड़ में टिकैत ने शिमला मिर्च की खेती कर 40,000 तक प्रतिमाह आमदनी कर रहे हैं। टिकैट सिंह ने बताया कि वह 3000 पौधा लगाए हुए हैं। एक पौधा लगाने तथा फल देने तक तैयार होने में है 10-12 रुपए का खर्च आता है और एक पौधा से दो से ढाई किलो तक फसल आती है, जिसे वह मंडी में भेजते हैं। बताया कि 50-70 रुपए प्रति किलो के िहसाब से खेत में शिमला मिर्च बिक जाता है।


