427 करोड़ का अवैध लेनदेन बताकर महिला डॉक्टर को 48 घंटे तक रखा डिजिटल अरेस्ट करीब तीन महीने पहले की बात है। घर से मॉर्निंग वॉक पर निकलीं बुजुर्ग डॉक्टर के पास अनजान नंबर से कॉल आता है। कुछ देर बात करने के बाद डॉक्टर खुद को घर के कमरे में बंद कर लेती हैं। दरवाजा न खुलने पर पति आवाज लगाते हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं आता। कॉल करने पर कट कर दिया जाता है। 48 घंटे बीतने के बाद घबराए पति पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचते हैं। पुलिस घर पहुंचती है। दरवाजा खुलवाते ही पूरी हकीकत सामने आ जाती है। डॉक्टर के मोबाइल पर पुलिस की ड्रेस में एक व्यक्ति दिखाई देता है, जो असली पुलिस को देखते ही फोन काट देता है। तब तक डॉक्टर 10.50 लाख रुपए ठगों को ट्रांसफर कर चुकी थीं। फिर सामने आती है डिजिटल अरेस्ट के खौफ से भरे 48 घंटे की कहानी, महिला डॉक्टर की जुबानी… पति हांफते हुए थाने पहुंचे, कहा- पत्नी ने खुद को कमरे में बंद किया केस – 1 मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाया और ले लिए 10 लाख 50 हजार रुपए
अनजान नंबर से कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अफसर बताया। कहा- आपके खाते में 427 करोड़ का अवैध लेनदेन हुआ है। आप पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस है। देखने में तो आप शरीफ लगती हैं। जांच में सहयोग करेंगी तो गिरफ्तारी नहीं होगी। वीडियो कॉल के दौरान ठगों ने 360 डिग्री कमरे का व्यू देखा और घर के किसी भी सदस्य से बात करने के लिए मना किया। वॉशरूम जाने तक के लिए परमिशन लेना पड़ी। सीबीआई अधिकारी बनकर बात करने वाले ने कहा- चुप रहोगी तो सुरक्षित रहोगी। डर की वजह से चुप रहीं। केस – 2 नौसेना अफसर से ड्रग्स पार्सल पकड़े जाने का झांसा देकर 68 लाख ठगे
एक नौसेना अधिकारी के पास अनजान नंबर से कॉल आया। खुद को फेडेक्स कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा- उनके नाम से ड्रग का पार्सल मुंबई से ताइवान भेजा गया है। इसके बाद कॉल कट हो गया। कुछ देर बाद मोबाइल पर स्काइप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का डीसीपी बताया और कहा- तुम्हारा भेजा गया पार्सल पकड़ा गया है। उसमें एमडीएमए ड्रग्स है। अधिकारी को ऑनलाइन कॉल के दौरान अॉब्जर्वेशन में रखा गया। गिरफ्तारी का डर दिखा 68 लाख रुपए की ठगी की गई। ठगी गई रकम दुबई पहुंचाई गई। किराए पर बैंक खाते देने वाले जालसाजों से ज्यादा बड़े अपराधी
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक- किराए के बैंक खाते साइबर ठगों की बैसाखी है। ठगी के बाद जिन खातों में रकम पहुंची। अधिकांश खाते किराए वाले ही निकले। जिन्हें 5 और 10 हजार रुपए का लालच देकर खाता धारक से किराए पर लिया गया था। अब खातों का लेनदेन टेलीग्राम पर हो रहा है। सबक- वे डराएंगे, धमकाएंगे, लेकिन आपको डरना नहीं है साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि भारत तो क्या पूरी दुनिया में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी कभी भी किसी भी तरह के ऑनलाइन पेमेंट या जुर्माना भरने का विकल्प नहीं देती है। इस बात को यदि गांठ बांध लेंगे तो कोई आपको किसी भी तरह से बाध्य नहीं कर पाएगा। टारगेट को भावनात्मक रूप से कमजोर करते हैं ठग कुछ केस ऐसे भी… सितंबर 2024 में भोपाल के निरंजन सिंह डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुए। ईडी और क्राइम ब्रांच अफसर बनकर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस बताया। उन्हें घर में कैद रखा और 44 लाख की ठगी की। बाद में निरंजन ने इसकी शिकायत क्राइम ब्रांच में की। मार्च 2024 में निरुपम कुमार को पार्सल में एमडीएमए ड्रग्स का डर दिखाकर डिजिटल रखा गया और 8.75 लाख की ठगी की। ठगों ने उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया। रकम ऐंठने के बाद जालसाजों ने किसी को कुछ न बताने की हिदायत भी दी। इनको ये करना था डरना नहीं है, पुलिस की ड्रेस में दिख रहे अफसर का नाम पूछें, संबंधित ऑफिस और थाने का नंबर लें। उस पर बात कर पूरा मामला बताएं।
देश में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है।
फर्जी एफआईआर नंबर को संबंधित थाने पर कॉल कर वेरिफाई करें। तत्काल 1930 पर कॉल करें। नजदीकी पुलिस स्टेशन पर भी कॉल कर सकते हैं।


