भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में वापसी हुई है। हितानंद अब आरएसएस में मध्य क्षेत्र के सह बौद्धिक प्रमुख बनाए गए हैं। अब जबलपुर उनका केन्द्र यानी मुख्यालय होगा, जहां से वे एमपी और छत्तीसगढ़ में संघ की नई जिम्मेदारी संभालेंगे। साइलेंट स्ट्रैटेजिस्ट माने जाते हैं हितानंद पर्दे के पीछे रहकर संगठन को साधने वाले हितानंद शर्मा को पार्टी के साइलेंट स्ट्रैटेजिस्ट के रूप में जाना जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तहसील स्तर के प्रचारक से लेकर भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री तक का उनका सफर, समर्पण, अनुशासन और परिणाम देने वाली कार्यशैली वाला रहा है। संघ की शाखा से शुरुआत वर्ष 1976 में मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के नईसराय में जन्मे हितानंद शर्मा को राष्ट्रप्रेम के संस्कार परिवार से मिले। पिताजी शासकीय सेवा में रहे, इसलिए शिक्षा प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर हुई। किशोरावस्था में ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुआ। विद्यालयीन-महाविद्यालयीन शाखाओं (सायं भाग), प्रभात शाखा और स्थानीय दायित्वों के माध्यम से उन्होंने संघ कार्य को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाया। तहसील-नगर से जिला और विभाग प्रचारक तक वर्ष 1995 में जीवन की दूसरी पारी शुरू हुई, जब वे संघ के विस्तारक बने और पूर्ण रूप से संगठन को समर्पित हो गए। इसके बाद अशोकनगर, चंदेरी, चांचौड़ा, कुंभराज में नगर प्रचारक रहे। जहां रहे, वहां संघ के कार्यालय बनवाए 2002 में श्योपुर के जिला प्रचारक बने। 2007 में शिवपुरी विभाग प्रचारक बनाए गए। 2011 में विदिशा विभाग प्रचारक बने। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ विचारधारा का विस्तार किया, बल्कि संगठन में एक “इंजीनियर” के रूप में पहचान बनाई। जहां-जहां वे रहे, वहां संघ कार्यालयों का निर्माण हुआ। विदिशा का भव्य ‘मधुकर भवन’ उनके संगठन कौशल की स्थायी पहचान बन गया। विद्या भारती में संकट से विजय तक लगभग 20 वर्षों तक संघ में निरंतर कार्य के बाद, 2015 में उन्हें विद्या भारती-मध्यभारत प्रांत का प्रांत संगठन मंत्री बनाया गया। यहां पूर्व छात्रों को जोड़ने के नए प्रयोग किए। सांगठनिक ढांचे का विस्तार किया। शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा दी। सत्ता परिवर्तन के बाद जब विद्या भारती को लेकर प्रतिकूल परिस्थितियां बनीं, तब उनके संयम, धैर्य और दूरदर्शी निर्णयों के चलते संस्था हर षड्यंत्र से विजयी होकर निकली। भाजपा में एंट्री और कठिन परीक्षा संघ ने उन्हें भाजपा का प्रदेश सह संगठन महामंत्री बनाया। जिस वक्त ये घोषणा हुए, उस वक्त वे कोरोना संक्रमित थे, लेकिन स्वस्थ होते ही सबसे पहले काम में जुट गए। उनके नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कोरोना काल में पीड़ितों के लिए व्यापक सेवा अभियान चलाया। इसी अवधि में 28-30 विधानसभा उपचुनाव हुए। सीमित समय और संसाधनों में उपचुनावों में जीत दर्ज की। बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक सटीक समन्वय ने उन्हें संगठन के भरोसेमंद रणनीतिकार के रूप में स्थापित कर दिया। सतत प्रवास, सीधा संवाद हितानंद शर्मा की पहचान, उनके लगातार दौरों और कार्यकर्ता-केंद्रित शैली से है। मात्र एक साल में उन्होंने प्रदेश के लगभग 50 प्रतिशत मंडलों का दौरा कर जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया।


