आदर्श गौशाला लाल टिपारा में पिछले दिनों गौवंश की मौत का मामला एक बार फिर से तूल पकड़ता नजर आ रहा है। नगर निगम परिषद के अंदर महिला पार्षद गौरा सिंह ने दैनिक भास्कर की प्रति दिखाकर मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि गौ मां से बढ़कर कोई नहीं है। इस घटना के लिए दोषी लोगों पर एक्शन होना चाहिए। विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के पार्षदों ने गौशाला में उक्त मामले को उठाते हुए व्याप्त गड़बडिय़ों की जांच के लिए कमेटी बनाने की बात कही। सभापति मनोज सिंह तोमर ने सभी से चर्चा कराई। अंत में परिषद का साधारण सम्मेलन 12 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया। जल विहार स्थित निगम परिषद में तीन घंटे तक साधारण सम्मेलन चला। गुरुवार को समझा जा रहा था कि एजेंडा खत्म हो जाएगा। लेकिन पार्षदों के स्थगन पर चर्चा नहीं हो सकी। पार्षद बार-बार स्थगन पर चर्चा कराना चाह रहे थे। परिषद के अंदर चार बिंदु जेडओ आफिस 3 में आने वाले लूटपुरा का नाम इंदिरा नगर करने, विभिन्न सड़कों के नामकरण, हनुमान टॉकीज से गुढ़ा तिराहे तक की रोड का नामकरण करने सहित एक अन्य प्रस्ताव वापस कर दिया गया। सड़कें बनाने से ज्यादा नाम रखने पर राजनीति पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रभात झा के नाम से सड़क का नाम: पहले ठहराव 24 जुलाई 2025 में हुआ। अब एमआईसी फिर से संकल्प कर लाई प्रस्ताव।
एजेंडा का बिंदु 4 में विभिन्न मार्गों के नामकरण किए जाने का एमआईसी का संकल्प आया। तभी सचिव बृजेश श्रीवास्तव को सभापति तोमर ने पूर्व में किए ठहराव पढ़ने को कहा। उन्होंने 24 जुलाई 2025 को 27 सड़क, परिसर के नाम महापुरुषों के नाम से, चौराहे, तिराहे और पार्क में महापुरुषों की प्रतिमा रखने सूची पढ़कर बताई। इनमें मुख्य रूप से विवेकानंद नीडम रेल ओवर ब्रिज का नाम स्वामी विवेकानंद सेतु, रेसकोर्स रोड का नाम महाराणा प्रताप के नाम, रॉक्सी पुल से लक्कड़खाना पुल तक की रोड अधिवक्ता श्याम बिहारी मिश्रा, गेड़े वाली सड़क का नाम पूर्व महापौर अरुणा सैन्या, माधवगंज थाना से जय मेडिकल चौराहा तक की सड़क का नाम पूर्व उप महापोर औंकार प्रसाद मुदगल के नाम से रखने आदि शामिल हैं। विरोध में पार्षद बैठे आसंदी के पास
वार्ड-62 के पार्षद मनोज सिंह यादव ने संपत्तिकर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे ही एक मामले में प्रभारी टीसी धर्मेंद्र सोनी का मामला उठाया। ये भी कहा कि वे एसपी आफिस में मेरे खिलाफ मामला दर्ज करने की शिकायत देकर आए है। उन्होंने इसकी जांच कराने और कर्मचारी को निलंबित करने की मांग उठाते हुए आसंदी घेरी। फिर उनके सपोर्ट में भाजपा के पार्षद भी पहुंच गए। सभापति बोले- क्या आयुक्त सहमत हैं
सड़कों के नामकरण के प्रस्ताव को लेकर सभापति ने निगमायुक्त को जवाब देने को कहा। आयुक्त ने कहा कि महापौर की तरफ से फाइल संकल्प के साथ आई थी। फिर परीक्षण कर महापौर को भेजा गया था। सभापति ने पूछा कि क्या आयुक्त इससे सहमत है। तब आयुक्त ने कहा कि इसमें आयुक्त का कोई योगदान नहीं है। इसके बाद सभापति ने कहा कि निगमायुक्त उक्त प्रस्तावों की जांच कर पुनः भेजें। गौशाला: इन पार्षदों ने कहा जांच कमेटी बनाई जाए


