साध्वी सरस्वती बोलीं- मंदिर तोड़कर बनाई मस्जिदों से आपत्ति:अयोध्या तो झांकी है, मथुरा-काशी बाकी है; महिलाओं से कहा शस्त्र-शास्त्र का ज्ञान जरुरी

छिंदवाड़ा के दशहरा मैदान में शनिवार को हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया। साध्वी सरस्वती ने कहा देश को सबसे ज्यादा खतरा देश के भीतर के जयचंदों से है, आज की हिंदू समाज की प्रत्येक माता-बहन को आत्मरक्षा के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि खाना बनाना याद हो या न हो, मेकअप करना आए या न आए, लेकिन तलवार चलाना हर स्त्री को अवश्य आना चाहिए। साध्वी सरस्वती ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिस तरह पुरुषों के लिए शस्त्र चलाना आवश्यक माना जाता है, उसी तरह महिलाओं के लिए भी यह समय की मांग है। हर स्त्री को शास्त्र और शस्त्र दोनों की शिक्षा मिलनी चाहिए, ताकि संकट या युद्ध की स्थिति में महिलाएं पीछे न रहें। समाज और राष्ट्र की रक्षा में अग्रिम पंक्ति में खड़ी हों। मंदिरों को तोड़कर बनाई गई मस्जिदों पर जताई आपत्ति
साध्वी सरस्वती ने अपने बयान में कहा कि अयोध्या तो अभी केवल झांकी है, मथुरा-काशी बाकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें मस्जिदों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आपत्ति इस बात पर है कि कई मस्जिदें मंदिरों को तोड़कर बनाई गईं, जबकि मस्जिदें मंदिरों को तोड़े बिना भी बनाई जा सकती थीं। उन्होंने कहा देश को सबसे बड़ा खतरा अपने ही जयचंदों से है, जो थोड़े से स्वार्थ के लिए अपना पक्ष बदल लेते हैं। ऐसे लोग राष्ट्रहित की बजाय व्यक्तिगत फायदे को प्राथमिकता देते हैं। दूध चढ़ाने पर विरोध और चादर चढ़ाने पर तंज
उन्होंने कहा कि जब शिवलिंग पर दूध चढ़ाया जाता है, तो कुछ लोग विरोध करते हुए कहते हैं कि दूध बच्चों को पिलाना चाहिए। साध्वी ने तंज कसते हुए कहा कि अब जब ठंड का मौसम है, तो ऐसे लोगों को कब्रों पर बड़ी-बड़ी चादरें चढ़ाने के बजाय उन्हें गरीबों में दान कर देना चाहिए। विदेशों के अनुभव साझा किए
अपने अनुभव साझा करते हुए साध्वी सरस्वती ने कहा कि जब वह विदेशों में सभाएं करने जाती हैं, तो वहां पति-पत्नी फ्रिज में रखे पिज़्ज़ा तक को लेकर झगड़ते हुए नजर आते हैं। हर व्यक्ति अपना खर्च खुद उठाता है और यदि पति के पैसों से खरीदा गया पिज्जा पत्नी ले ले, तो इस पर भी विवाद हो जाता है। भारतीय संस्कृति को बताया अनूठा
उन्होंने कहा कि इसके बिल्कुल विपरीत भारतीय संस्कृति निराली है, जहां रात के 2 बजे भी पति घर लौटे तो मांएं और बहनें प्रेमपूर्वक खाना गर्म कर परोसती हैं। यह भारतीय परिवारों के आपसी समर्पण, प्रेम और संस्कारों को दर्शाता है। कलश यात्राएं निकाली गईं
इससे पहले छिंदवाड़ा के छोटी बाजार, गुलाबरा, लालबाग सहित छह से अधिक स्थानों से बैंड-बाजे, डीजे और झंडों के साथ टोली और कलश यात्राएं निकाली गईं। सभी चल समारोह एक साथ दशहरा मैदान पहुंचे, जहां तिरंगा और भगवा झंडों से पूरा क्षेत्र राष्ट्रभक्ति और धार्मिक उल्लास से सराबोर नजर आया। मैदान में कार्यक्रम का शुभारंभ गोमाता पूजन और भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में छिंदवाड़ा सांसद विवेक बंटी साहू, भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव, राजू नरोटे, रोहित पोफली सहित नेतागण और सैकड़ो की संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

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