सामान न मिलने से अम्बेडकर अस्पताल में इलाज पर असर:सरकारी आघात… हार्ट हॉस्पिटल में 4 महीने से बायपास सर्जरी बंद, 2 मरीज दम तोड़ चुके, 8 मरीजों को ऑपरेशन का इंतजार

प्रदेश के इकलौते सरकारी हार्ट हास्पिटल में 4 महीने से बायपा, ओपन हार्ट सर्जरी बंद है। इस वजह से दो मरीजों की मौत हो चुकी है। 8 मरीज ऑपरेशन के इंतजार में अस्पताल में पड़े हैं। उनके परिजन को प्रबंधन दिलासा दे रहा है कि कुछ दिन और इंतजार करो, जल्द ऑपरेशन किया जाएगा। मामला अम्बेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई)का है। जब भास्कर ने पड़ताल की तो पता लगा कि बायपास और ओपन हार्ट सर्जरी के लिए जो वेंडर सामान की सप्लाई करता था, उसका भुगतान दो साल से नहीं हुआ है। यही वजह है कि वह एवीजी किट, वाल्व जैसे जरूरी सामान तक अस्पताल में नहीं है। भास्कर टीम जब एसीआई के वार्ड में पहुंची, तो एसी बंद थे, मरीज गर्मी से बेहाल मिले। कहीं से क्रॉस वेंटिलेशन नहीं था। दरवाजे से गलियारे की बदबू आती, पर खुला रखना मजबूरी है। इंतजार में हो गई मौत
नवा रायपुर की रहने वाली सती बाई यादव की मौत ऑपरेशन के इंतजार में हो गई। उनके वॉल्व में लीकेज था। वे अगस्त 2024 से अस्पताल के चक्कर काट रही थी। उनके पति यशवंत बताते हैं कि हर बार-बार ऑपरेशन की डेट दी गई, क्योंकि ऑपरेशन का सामान ही नहीं था। वह महज 36 साल की थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मेरी पत्नी की जिंदगी लील ली। एम्स से आए मरीज की मौत
65 साल की त्रिवेणी बाई के फेफड़े में पानी भर गया था। वाल्व खराब होने से हार्ट कमजोर ​था। सांस लेने में दिक्कत थी। उनका इलाज एम्स रायपुर में चल रहा था। वहां मरीजों की संख्या अधिक होने से उन्हें अम्बेडकर अस्पताल भेज दिया गया। यहां 25 दिन वे वार्ड में भर्ती रहीं। हर बार ऑपरेशन का आश्वासन मिला। इस बीच, उन्होंने अंतिम सांस ले ली। अक्टूबर में टेंडर खत्म हुआ अस्पताल ने जिन वेंडर्स को इनपैनल किया था, उनकी सप्लाई अक्टूबर में थम गई। जो सामान स्टॉक में था,जनवरी तक उससे ऑपरेशन होते रहे। फिर जेम से इंप्लांट के लिए टेंडर किया गया, जो खारिज हो गया। दोबारा वेंडर से सप्लाई मंगाई गई, पर उसने बकाया न मिलने से मना कर दिया। जनवरी से जो मरीज भटक रहे हैं, उनका ऑपरेशन आज तक नहीं हो पाया है। 4 महीने में लगभग 30 नए मरीजों को लौटा दिया गया। खरीदी के लिए पेमेंट कॉलेज को अलॉट कर दिया है। वहां से फाइल हमें भेजी थी, जबकि खरीदी वहीं से होनी है। पेमेंट करना उनका काम है।
– किरण कौशल, डायरेक्टर, मेडिकल एजुकेशन

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