भास्कर न्यूज| करनौद स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के कई गांवों में लाखों रुपए खर्च कर महिला और पुरुषों के लिए सामुदायिक टॉयलेट बनाए गए, लेकिन अधिकतर पंचायतों में टॉयलेट शुरू से ही बंद पड़े हैं। निर्माण के समय सही निगरानी नहीं हुई। पंचायतों को एजेंसी बनाकर जैसे-तैसे निर्माण करा दिया गया। अब ये टॉयलेट टूटने लगे हैं। गांवों में इनका उपयोग भी बहुत कम हो रहा है। कुछ सरपंचों ने तो टॉयलेट गांव से दूर जंगलों में बनवा दिए। गांवों में इनकी देखरेख और संचालन के लिए स्वच्छता समिति बनानी थी। लेकिन टॉयलेट बनने के बाद भी कोई समिति नहीं बनी। नतीजा, ये टॉयलेट अब खंडहर बन चुके हैं। जिनके भरोसे गांवों में स्वच्छता लाने की बात कही गई थी, उन्हें ही जिम्मेदारों ने नजरअंदाज कर दिया। ओडीएफ घोषित गांवों में लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय की सुविधा देने के लिए ये टॉयलेट बनाए गए थे। लेकिन अब यह योजना सिर्फ कागजों में रह गई है। बम्हनीडीह ब्लॉक की लगभग सभी पंचायतों में सामुदायिक स्वास्थ्य शौचालय बनाए गए हैं। लेकिन अधिकतर जगहों पर ताले लटके हैं। बरकुट में जंगल में बनवाया टॉयलेट बम्हनीडीह ब्लॉक के ग्राम पंचायत करनौद से आश्रित गांव चोरहादेवरी के बरकुट में जंगल में टॉयलेट बनवाया गया। वर्ष 2021-22 में 3 लाख 50 हजार रुपए खर्च हुए। अब वह खंडहर बन चुका है। ताला लगा है। ग्राम पंचायत नकटीडीह में भी टॉयलेट जर्जर हालत में बंद पड़ा है। करनौद पंचायत में वर्ष 2020-21 में 4 लाख 50 हजार रुपए खर्च कर पंचायत मैदान तालाब के पास टॉयलेट बना। निर्माण के बाद से ही वहां ताला लटका है। गार्डन चौक के पास वर्ष 2023-24 में 3 लाख 75 हजार रुपए खर्च कर टॉयलेट बना। वह भी उपयोग में नहीं है।


