सारंगपुरी की 5.20 एकड़ बंजर जमीन पर हरियाली छा गई

भास्कर न्यूज | धमतरी धमतरी ब्लॉक के सारंगपुरी में 5.20 एकड़ की जमीन बंजर थी। अतिक्रमण भी शुरू हो रहा था। इसे बचाने व उपयोग में लाने की पहल शुरू हुई। यहां साल 2024-25 में मिश्रित पौधरोपण काम शुरू हुआ। बंजर जमीन में हरियाली व नमी रहने के बाद सब्जी की खेती भी शुरू हुई। इस जमीन को 14.14 लाख रुपए मनरेगा व डीएमएफ से संवारा गया। यहां 840 फलदार पौधे लगाए गए। इसके साथ ही भूमि सुधार, जल संरक्षण और आय संवर्धन को भी जोड़ा गया। पौधों के बीच अंतर वाली भूमि पर मौसमी सब्जियों भाटा, बरबट्टी, ग्वारफली, गोभी, लौकी, करेला समेत सब्जियों का फसल लगाया गया। यह अगस्त 2025 से शुरू हुआ। 3 महीने में समूह को करीब 1.50 लाख रुपए की अतिरिक्त आय हो चुकी है। राधाकृष्णा स्वसहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि पहले मजदूरी पर निर्भर थे, पर अब सब्जियों से आय कमा रही हैं। आर्थिक उन्नति से आत्मविश्वास और सामुदायिक नेतृत्व क्षमता बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पहले यह भूमि बंजर थी और बारिश आते ही मिट्टी बह जाती थी। पौधरोपण के बाद जड़ें मिट्टी को बांधने लगी। वर्षा के पानी का कटाव कम हुआ। भूमि उपजाऊ क्षमता बढ़ी। अतिक्रमण से मुक्त खाली पड़ी जमीन पर अतिक्रमण का संकट हमेशा रहता है। परंतु अब जब यह क्षेत्र उपयोगी परियोजना में बदल चुका है। वृक्षारोपण कार्य की जिम्मेदारी सारंगपुरी को मिली। इसके लिए राधाकृष्णा स्वसहायता समूह में 13 सदस्य हैं। महिला समूह पहले से ही सक्रिय थी, परंतु उनके पास स्थाई आय का कोई पुख्ता स्रोत नहीं था। इस कार्य के लिए समूह की महिलाओं ने पौधरोपण की प्रक्रिया को गति देना शुरू किया। भूमि की साफ-सफाई, गड्ढा खुदाई, पौधों की रोपाई, फेंसिंग कार्य, बोर खनन और पानी व्यवस्था जैसे सभी कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। डीएमएफ मद से फेंसिंग और बोर खनन की व्यवस्था की गई, इससे पौधों का संरक्षण आसान हो गया। महिलाओं ने कहा कि यह परियोजना राज्य के अन्य पंचायतों के लिए भी अनुकरणीय बन चुका है। आने वाले वर्षों में आम, अमरूद, नींबू, कटहल, जामुन, सीताफल, करौंदा जैसे पौधों से फल उत्पादन शुरू होगा। साल 2024-25 में 840 पौधे लगाए गए थे। इससे समूह की आय में बढ़ोतरी होगी। सब्जी उत्पादन लगातार जारी रहेगा। इसके अलावा समूह फल प्रसंस्करण, अचार-मुरब्बा निर्माण, सब्जी पैकिंग, स्थानीय बाजार आपूर्ति जैसे कार्य भी शुरू कर सकती हैं।

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