सालों तक डॉक्टर में रहता है,मरीज की मौत का बोझ:चुप्पी को समझना जरूरी; देशभर के लिए प्रेरणा बना इंदौर का मॉडल बना

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के 73वें एनुअल कॉन्फ्रेंस NSICON 2025 का रविवार को गरिमामय समापन हुआ। चार दिनों तक चली इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देश और विदेश से आए 1600 से अधिक न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, शोधकर्ता, न्यूरो नर्सेस और मेडिकल प्रोफेशनल्स ने भाग लिया। इसमें न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में ज्ञान, शोध और तकनीक के साथ साथ समाज और जन जागरूकता से जुड़ाव का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। कॉन्फ्रेंस के दौरान ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, एपिलेप्सी, स्पाइन की बीमारियां, न्यूरो ट्रॉमा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक सर्जरी और न्यूरो नर्सिंग जैसे विषयों पर गहन वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। लगभग 200 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनका उद्देश्य इलाज को और अधिक सुरक्षित, सुलभ और प्रभावी बनाना रहा। NSICON 2025 की सबसे विशेष पहचान रही इसका पब्लिक अवेयरनेस फोकस। ‘न्यूरोथॉन इंदौर – रन फॉर ब्रेन, वियर हेलमेट’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सड़क सुरक्षा, हेड इंजरी की रोकथाम और आईएसआई मार्क हेलमेट पहनने का संदेश सीधे आम जनता तक पहुंचाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने हेलमेट पहनने की सामूहिक शपथ भी ली। इस अवसर पर NSICON 2025 के ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. वसंत डाकवाले ने कहा आयोजन की सफलता पूरे टीमवर्क का परिणाम है। आयोजन ने यह साबित किया कि चिकित्सा केवल इलाज नहीं, बल्कि समाज को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी भी है। ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. जेएस कठपाल ने कहा इंदौर ने जिस अपनत्व और सहयोग के साथ NSICON 2025 की मेजबानी की, वह सराहनीय है। यह शहर अब न्यूरोसाइंस जैसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों के लिए एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। ब्रेन डेथ और अंगदान को लेकर हुई वर्कशॉप में डॉ. ईश्वर एचवी (श्री चित्रा तिरुनाल इंस्टिट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी, तिरुवनंतपुरम) ने कहा ब्रेन डेथ एक पूरी तरह कानूनी और वैज्ञानिक प्रक्रिया है। एक ब्रेन डेथ मरीज 7 से 8 लोगों को अंगदान के माध्यम से नया जीवन दे सकता है। डॉक्टरों की जिम्मेदारी है कि वे सही जानकारी देकर इस जीवन रक्षक प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं। डीप ब्रेन स्टिमुलेशन और एपिलेप्सी सर्जरी की जरूरत पर डॉ. पूजा चौधरी (श्री चित्रा तिरुनाल इंस्टीट्यूट) ने कहा कि मध्य प्रदेश और इंदौर में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन और एपिलेप्सी सर्जरी की अत्यधिक आवश्यकता है। सही समय पर सर्जरी से कई मरीजों को दवाइयों पर निर्भरता से मुक्ति मिल सकती है। अब प्रदेश के मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। डॉ. लोकेन्द्र सिंह (डायरेक्टर CIMS, नागपुर)ने कहा कि डॉक्टर भी इंसान हैं। जिन मरीजों का हम वर्षों इलाज करते हैं, उनके जाने का दर्द हम भीतर ही भीतर सहते हैं। चिकित्सा व्यवस्था हमसे पूर्णता की अपेक्षा करती है, लेकिन हमारे दुख और अपराधबोध के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं देती। भावनाएं साझा करने और सपोर्ट सिस्टम बनाना अब अनिवार्य हो गया है।सोनाली कुमावत ने यह स्पष्ट किया कि मरीज की देखभाल में प्रशिक्षित न्यूरो नर्सेस की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। यह कॉन्फ्रेंस नर्सिंग समुदाय को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। डॉ. मानस पाणिग्रही और नव निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. श्रीधर (न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया) ने कहा कि इंदौर में हुई कॉन्फ्रेंस पूरे देश के लिए एक उदाहरण है। वैज्ञानिक सत्रों के साथ जिस तरह सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रमों को जोड़ा गया। यह विशेष रूप से प्रेरणादायक रहा। ‘रन फॉर ब्रेन’ जैसे अभियानों को अन्य शहरों में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ब्रेन हेल्थ और सड़क सुरक्षा को लेकर पूरे देश में जागरूकता बढ़े। लाइमलाइट में रहे सड़क सुरक्षा से जुड़े पोस्टर्स
रन फॉर ब्रेन मैराथन के दौरान लगाए गए जन-जागरूकता पोस्टर्स ने आम नागरिकों को सरल और प्रभावशाली संदेश दिए। ‘हेलमेट कोई बोझ नहीं है’, ‘सर्वाइकल गर्दन पर इसका कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता’ और ‘देखने व सुनने में कोई बाधा नहीं आती’ जैसे वाक्यों ने हेलमेट को लेकर फैली गलतफहमियों को तोड़ा।
पोस्टर्स में यह भी स्पष्ट किया गया कि ‘थोड़ी सी दूरी हो या धीमा ट्रैफिक, हेलमेट फिर भी जरूरी है’ और ‘हेड इंजरी घातक हो सकती है, हेलमेट जीवन बचाता है’। इसके साथ ही ‘स्वस्थ मस्तिष्क चाहिए तो नशा नहीं, न शराब, न तंबाकू, न ड्रग्स’ और ‘हेल्दी ब्रेन, हेल्दी बॉडी’ जैसे संदेशों ने ब्रेन हेल्थ को जीवनशैली से जोड़ते हुए लोगों को आत्म-सुरक्षा और स्वस्थ आदतों के लिए प्रेरित किया। कॉन्फ्रेंस के अंतिम सत्रों में इंदौर के न्यूरोलॉजिस्ट एवं न्यूरोसर्जन्स ने भी अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिन्हें विशेषज्ञों ने सराहनीय बताया। इन प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि इंदौर न केवल आयोजन की मेजबानी में, बल्कि न्यूरोसाइंस के शोध और नवाचार में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।आयोजन में एमवाय अस्पताल की न्यूरो नर्स डॉ. (पीएचडी) सोनाली कुमावत और विद्या मेनन के साथ सुपर स्पेशएलिटी हॉस्पिटल की सभी न्यूरो नर्सेस ने सराहनीय कामों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। समापन इस संदेश के साथ हुआ कि आधुनिक न्यूरोसाइंस केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं है। यह समाज, जागरूकता, संवेदना और जिम्मेदारी का साझा मंच है। इसमें इंदौर ने एक नई मिसाल कायम की है।

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