कोटा में वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिलेभर में उत्साह और व्यापक सहभागिता के साथ किया गया। सुबह से ही न्यायालय परिसर में लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। बड़ी संख्या में नागरिक अपनी विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर लोक अदालत पहुंचे, जिससे पूरे दिन न्यायालय परिसर में चहल-पहल बनी रही। लोक अदालत में बिजली, पानी, नगर निगम, राजस्व, बैंक ऋण, बीमा, चेक अनादरण, पारिवारिक विवाद और सड़क दुर्घटना क्षतिपूर्ति जैसे अनेक मामलों की सुनवाई की गई। लोक अदालत की पीठ ने प्रकरणों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर ही समाधान करने तथा लंबित मामलों में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आपसी सहमति से कई मामलों का निस्तारण किया गया, जिससे वर्षों से लंबित प्रकरणों में फरियादियों को तुरंत राहत मिली। प्रशासनिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की सक्रिय भूमिका के चलते बड़ी संख्या में प्रकरणों का मौके पर ही समाधान संभव हो सका। डिस्ट्रिक्ट जज सत्यनारायण व्यास ने बताया कि लोक अदालत में सभी वर्गों के लोग पहुंच रहे हैं, क्योंकि यहां मामलों का त्वरित निस्तारण होता है। उन्होंने जानकारी दी कि लोक अदालत में दो मामलों में क्रमशः 60 लाख और 20 लाख रुपये का आपसी समझौता हुआ है। इससे स्पष्ट है कि लोक अदालत के माध्यम से बड़े आर्थिक विवादों का भी सौहार्दपूर्ण समाधान हो रहा है। उन्होंने बताया कि कोटा मुख्यालय सहित रामगंज मंडी, इटावा, सांगोद और दीगोद सहित कुल 10 स्थानों पर लोक अदालत का गठन किया गया है। पिछली लोक अदालत में 1 लाख 52 हजार प्रकरणों का निस्तारण किया गया था, जबकि इस बार 38,500 प्रकरण रेफर किए गए हैं और लक्ष्य इससे अधिक मामलों के निस्तारण का है। लोक अदालत में बिजली, टेलीफोन और अन्य बिलों से जुड़े विवादों का भी पूर्ण निस्तारण किया जा रहा है। आमजन ने लोक अदालत को समय, धन और मानसिक तनाव बचाने वाली प्रभावी वैकल्पिक न्याय व्यवस्था बताया।


