भास्कर एक्सपर्ट प्रत्येक चंद्र मास में दो चतुर्थी होती है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश की तिथि है। विनायकी चतुर्थी अमावस्या के चौथे दिन मनाई जाती है। इस माह देश भर में 23 दिसंबर को यह शुभ पर्व मनाया जाएगा। सुबह 10.30 से 11.41 बजे तक पूजा करने का शुभ मुहूर्त है। यह साल का आखिरी विनायक चतुर्थी पर्व है। इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा करना शुभ होता है। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी या विनायक चतुर्थी कहा जाता है। वहीं, पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। वैसे तो विनायक चतुर्थी का व्रत हर महीने में होता है, लेकिन सबसे मुख्य विनायक चतुर्थी का व्रत पौष मास की अमावस्या के बाद होता है। खरमास होने से इसका महत्व ज्यादा है। विनायक चतुर्थी को श्री गणेश का पूजन करना लाभदायी माना गया है। विघ्नहर्ता यानी आपके सभी दुःखों को हरने वाले देवता हैं। श्रवण नक्षत्र, रवि, भौम जयी योग का बन रहा संयोग विनायक चतुर्थी पर श्रवण नक्षत्र, रवि योग, भौम जयी योग, स्थाई जायद योग का शुभ संयोग बन रहा है। 23 दिसंबर को दिन में चतुर्थी 10.33 बजे से श्रवण नक्षत्र में आ रही है, जो 24 दिसंबर को दिन में 10.52 बजे तक रहेगी। चतुर्थी चंद्रव्यापनी व्रत होने से इसका मान 23 को ही होगा। मंगलवार को पड़ने के कारण अंगरकी विनायकी चतुर्दशी कहलाएगा। चंद्र को अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त संध्या 05:13 बजे से रात्रि 08:09 बजे है। दुर्गा बाड़ी में भगवान गणेश गणेश शुभ लाभ मंत्र… ऊं श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वरवर्द सर्वजनं में वाष्मण्य नमः अर्थः हे भगवान श्री गणेश, आपकी कृपा और आशीर्वाद हमें हर जन्म मिलता रहे वक्रतुंड गणेश मंत्र… वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा अर्थः घुमावदार सूंड वाले, करोड़ सूर्य के समान। मेरे प्रभु, कार्य बिना विघ्न के पूरे करें… पंडित प्रणव कुमार मिश्रा, ज्योतिषाचार्य ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर लाल रंग के वस्त्र धारण करें। दोपहर पूजन के समय अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, पीतल, तांबा, मिट्टी अथवा सोने या चांदी से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित करें। संकल्प के बाद षोडशोपचार पूजन कर श्री गणेश की आरती करें। श्री गणेश की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। अब गणेश का प्रिय मंत्र ॐ गं गणपतये नमः का उच्चारण करते हुए 21 दूर्वा दल चढ़ाएं। अब श्री गणेश को बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से पांच लड्डू ब्राह्मण को दान दें और पांच लड्डू श्री गणेश के चरणों में रखकर बाकी को प्रसाद स्वरूप बांट दें। पूजन के समय श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें। ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा दें। यदि आप में शक्ति हो तो व्रत करें अथवा शाम के समय भोजन ग्रहण करें। शाम के समय गणेश चतुर्थी कथा, श्रद्धानुसार गणेश स्तुति, श्री गणेश सहस्रनामावली, गणेश चालीसा, गणेश पुराण आदि का स्तवन करें। संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करके श्री गणेश की आरती करें व ॐ गं गणेशाय नमः मंत्र की माला जपें। ऐसे करें भगवान गणेश का पूजन भास्कर एक्सक्लूिसव दैनिक भास्कर, रांची, गुरुवार, 11 दिसंबर, 2025 | 7


