भास्कर संवाददाता | बड़वानी नए साल की पहली गुप्त नवरात्र सोमवार से शुरू हो रही है। यह नवरात्र साधना‑सिद्धि करने वाले साधकों, तांत्रिकों व आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत विशेष मानी जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ माह की यह गुप्त नवरात्र प्रतिपदा तिथि से उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में शुरू हो रही है, जिसमें सर्व सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस महासंयोग में की गई साधना विशेष फलदायी मानी जाती है। ओझर के ज्योतिष पं. समर्थ शर्मा ने बताया इसका समापन 27 जनवरी को सर्व सिद्धि रवि योग में होगा, जिससे पूरे नौ दिन देवी साधना के लिए अत्यंत शुभ रहेंगे। गुप्त नवरात्र के दौरान मंदिरों में यज्ञ‑हवन, विशेष पूजा‑अनुष्ठान और आहूतियों का आयोजन किया जाता है। साधु‑संत और ज्योतिषाचार्य अपने मंत्र, तंत्र और ध्यान साधनाओं को पूर्ण करने के लिए नौ दिनों तक विशेष पूजा करते हैं। पं. शर्मा ने बताया कि गुप्त नवरात्र की साधना सामान्य पूजा से अलग होती है। इसमें राशि अनुसार देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिससे साधकों के साथ आमजनों को भी मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं से राहत मिलती है। गुप्त नवरात्र केवल साधना और सिद्धि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी शुभ माना गया है। इन नौ दिनों में मकान, दुकान, नया कार्यालय, व्यापार, संस्थान तथा अन्य नवीन योजनाओं की नींव रखने के कार्य किए जाते हैं। इस अवधि में शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं कम आती हैं और स्थायित्व प्राप्त होता है।


