साल 2025 विदा हो रहा है, लेकिन खंडवा जिले के लिए यह साल दो ऐसी भयानक तस्वीरें छोड़कर जा रहा है, जिनका दर्द कभी नहीं भरेगा। संयोग देखिए, दोनों ही बड़े हादसे ‘नवरात्र’ के समापन पर हुए। एक चैत्र नवरात्र में गणगौर विसर्जन की तैयारी के दौरान और दूसरा शारदीय नवरात्र में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के समय। इन दो घटनाओं में कुल 19 लोगों की जान चली गई। आस्था और लापरवाही के इस टकराव ने हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया। पहला हादसा: कुएं में उतरा एक, बचाने कूदे 7 और सब खत्म पहला बड़ा हादसा चैत्र नवरात्र के आखिरी दिन छैगांवमाखन के कोंडावत गांव में हुआ था। यहां गणगौर विसर्जन से पहले परंपरा के अनुसार कुएं की सफाई की जा रही थी। गांव की नाली का गंदा पानी इसी कुएं में गिरता था, जिससे अंदर जहरीली गैस और दलदल बन गया था। दूसरा हादसा: विसर्जन के लिए जा रहे थे, 8 बच्चियों समेत 11 दबे साल का दूसरा बड़ा हादसा शारदीय नवरात्र के आखिरी दिन पंधाना के जामली गांव में हुआ। राजगढ़ गांव के 35-40 आदिवासी लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली से दुर्गा विसर्जन के लिए अर्दला तालाब पहुंचे थे। सवाल छोड़ गया 2025: आस्था भारी या लापरवाही? 2025 का अंत खंडवा को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या आस्था के आयोजनों में सुरक्षा अब भी सबसे कमजोर कड़ी है? दोनों हादसों ने यह साबित किया कि एक छोटी सी लापरवाही (कुएं में बिना सुरक्षा उतरना और ओवरलोडेड ट्रैक्टर को ढलान पर ले जाना) कैसे पूरे गांव को जिंदगीभर का दर्द दे सकती है।


