हजारीबाग के ऐतिहासिक बुढ़वा महादेव मंदिर में सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। सुबह से ही शिवभक्त मंदिर में दर्शन के लिए कतारबद्ध नजर आए। श्रद्धालु बेलपत्र, दूध, दही, गंगाजल और पुष्प अर्पित कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर के मुख्य पुजारी प्रमोद मिश्रा के अनुसार, यह मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना है। पहले इसे ‘बुद्धा महादेव’ के नाम से जाना जाता था। मान्यता है कि भगवान बुद्ध यहां कुछ समय ठहरे थे। कालांतर में यह स्थान ‘बुढ़वा महादेव’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया। हजारीबाग की सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस मंदिर में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूरी होती है। सावन में इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित किया। मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि बाबा बैजनाथ धाम देवघर जाने वाले कांवरिया पहले यहां दर्शन करते हैं। वापसी में भी वे यहां दर्शन करने के बाद ही अपने घर जाते हैं। बुढ़वा महादेव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि हजारीबाग की सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।


