बालाघाट में 3 जनवरी को देश की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती मनाई गई। फुले चौक पर मरार माली समाज के सदस्यों ने अपने आराध्य ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। बालाघाट मुख्यालय सहित पूरे जिले में सावित्रीबाई फुले को उनकी जयंती पर याद किया गया। सामाजिक वक्ताओं ने माता सावित्रीबाई फुले के समाज और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके जीवन से प्रेरणा लेने और उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। फुले चौक पर जयंती समारोह के बाद, सभी सामाजिक बंधु एक रैली के माध्यम से सरेखा स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले मिडिल स्कूल पहुंचे। यहां एक मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें समाज के वरिष्ठों और बुजुर्गों को सम्मानित किया गया। महिला संगठन की सहसचिव सुशीला पंचाले ने इस अवसर पर कहा कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिलाने की शुरुआत माता सावित्री फुले ने की थी। उन्होंने महिला शिक्षा की नींव रखी, जिसके कारण आज महिलाएं शिक्षित होकर समाज में अपने दायित्वों का निर्वहन कर पा रही हैं। पंचाले ने यह भी बताया कि फुले दंपत्ति ने देश के सामाजिक उत्थान के लिए शोषित और पीड़ित समाज के लिए संघर्ष किया। उनके प्रयासों से आज मानव समाज का स्वरूप बदला है। उन्होंने जोर दिया कि यदि ये महापुरुष न होते, तो आज का बदला हुआ सामाजिक स्वरूप देखने को नहीं मिलता।


