सामाजिक समरसता न्याय मंच की ओर से सावित्री बाई फुले जयंती के मौके पर शुक्रवार को द्वितीय रक्तदान शिविर और कैलेंडर विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जंक्शन में कचहरी रोड स्थित जांगिड़ सुथार धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों के रूप में उद्योगपति शिवरतन खड़गावत, निजी स्कूल-कॉलेज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष तरुण विजय, सरपंच रोहित स्वामी, सरपंच प्रतिनिधि रतन धवल आदि ने शिरकत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले वंचित, शोषित, पीड़ित और पिछड़े वर्ग के लिए मां सरस्वती के समान थीं। बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया। कुरीतियों को समाप्त करवाने के लिए आवाज बुलंद की। 200 वर्ष पहले जिस समय पुरुष की शिक्षा का भी विषय बड़ा चिंतनीय था। उस समय में सावित्री बाई फुले ने शिक्षा की अलख जगाई। उस समय में अगर सावित्री बाई फुले ने संघर्ष नहीं किया होता तो आज नारी जाति को शायद ही इतना सम्मान मिल पाता। उन्होंने सामाजिक स्तर पर महापुरुषों की जयंती मनाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे सामाजिक समरसता का भाव कायम होता है। मंच के जिलाध्यक्ष रामप्रताप भाट ने कहा कि सामाजिक समरसता न्याय मंच सम्पूर्ण समाज के हित और उत्थान के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि रक्तदान शिविर के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है कि ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले को भारत रत्न देकर वंचित और पिछड़े समाजों के लिए अच्छा संदेश दें। राजस्थान के मुख्यमंत्री से भी मांग है कि प्रदेश में 3 जनवरी को सावित्री बाई फुले की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए। इसके साथ-साथ राजस्थान सरकार भारत रत्न की मांग को भारत सरकार के समक्ष रखकर इसे पूर्ण करवाए। उन्होंने बताया कि पिछड़े और वंचित वर्गों के महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर मंच की ओर से समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।


