सिंगरौली जिले के पशु चिकित्सालय परिसर में संचालित गौ सेवा केंद्र के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम ने केंद्र में सुविधाएं विकसित करने के लिए बजट आवंटित किया था और कलेक्टर से अनुमति मिलने के बाद वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया था। मंगलवार को जब ठेकेदार निर्माण कार्य शुरू करने पहुंचा, तो पशु चिकित्सालय के अधिकारियों ने काम रोककर उसे वापस लौटा दिया। यह कार्रवाई पशु चिकित्सालय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. आरके जायसवाल द्वारा कलेक्टर और नगर निगम को लिखे गए एक पत्र के बाद हुई। पत्र में उन्होंने परिसर में किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण पर आपत्ति जताई थी। डॉ. जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह भूमि पशु चिकित्सालय विभाग की संपत्ति है और भविष्य में विभागीय जरूरतों के लिए यहां निर्माण प्रस्तावित हो सकता है, इसलिए गौ सेवा केंद्र के लिए स्थायी निर्माण उचित नहीं है। इस फैसले से गौ सेवा केंद्र से जुड़े गौ सेवकों में भारी आक्रोश है। गौ सेवा का कार्य कर रहे नितिन कुमार ने बताया कि इस केंद्र में घायल और बीमार गोवंशों को उपचार के लिए रखा जाता है। उपचार के बाद उन्हें गौशाला भेजा जाता है। हालांकि, वर्तमान में यहां गोवंशों के लिए न तो छाया की उचित व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की समुचित सुविधा। उन्होंने यह भी बताया कि बारिश के मौसम में परिसर में जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे पहले भी गोवंशों की मौत हो चुकी है। गौ सेवकों का कहना है कि नगर निगम द्वारा प्रस्तावित निर्माण से गोवंशों को बुनियादी सुविधाएं मिलतीं, लेकिन काम रोके जाने से उनकी परेशानी बढ़ गई है।


