सिकलसेल इमारत की ड्राइंग डिजाइन पर आखिरकार पांच साल बाद सहमति बन गई है। लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसरों को अभी भी इस विवाद से छुट्टी नहीं मिली है। इसमें अभी भी कई पेंच फंसे हुए हैं। क्योंकि पैथालॉजी लैब, कोऑर्डिनेटर रूम, रेडियोलॉजी, कैंसर डिपार्टमेंट और ब्लड बैंक के लिए बनने वाले कमरे हॉस्पिटल गाइडलाइन के अनुसार ही बनाना होगा। बिल्डिंग के कमरों में मशीनें कहां लगेंगी? मरीजों के लिए बेड कहां लगेंगे? दवाएं कहां दी जाएंगी? इसकी मंजूरी के लिए डिजाइन केंद्र सरकार के पास भेजना होगा। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही कमरों का निर्माण शुरू होगा। फिलहाल पीडब्ल्यूडी इमारत की प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव शासन को भेजेगा। मंजूरी मिलने के एक माह बाद बिल्डिंग बनाने का काम शुरू होगा। सिकलसेल बिल्डिंग के लिए शासन ने 48 करोड़ का बजट मंजूर किया है। पीडब्ल्यूडी को इसकी डिजाइन 2.84 एकड़ में बनाना था, लेकिन अफसरों ने चुपचाप 2.62 एकड़ में डिजाइन बनवा दी। इसके लिए विभाग ने 80 लाख रुपए भी खर्च कर दिए। इस वजह से सिकलसेल की इमारत छोटी हो गई थी। अफसरों ने टेंडर जारी कर इमारत बनाने के लिए नींव की खुदाई कराई तो अस्पताल के डायरेक्टर ने तत्काल इसकी जांच करवाकर बिल्डिंग निर्माण के काम पर रोक लगा दी। उसके बाद से इमारत का निर्माण बंद है। पांच मंजिला बनेगा भवन, पहले तल पर होगी ओपीडी सिकलसेल की नई बिल्डिंग पांच मंजिला होगी। पहले तल में ओपीडी होगी जहां मरीजों का इलाज किया जाएगा। डॉक्टरों के कमरे भी होंगे। पैथालॉजी लैब, कोऑर्डिनेटर रूम, दवा स्टोर भी इसी में होगा। दूसरे फ्लोर में रिसर्च सेंटर और तीसरे फ्लोर में कांफ्रेंस रूम, ऑडिटोरियम, वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम बनाया जाएगा। चौथे फ्लोर में रिहैबिलिटेशन सेंटर और पांचवें में टीचिंग ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने से सिकलसेल के मरीजों के इलाज और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।


