सिक्किम में भारी बारिश और भूस्खलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लाचुंग में भूस्खलन से रास्ते बंद हो गए हैं। यहां झारखंड के करीब दर्जनभर परिवार फंस गए हैं। उन्होंने झारखंड सरकार से उन्हें बाहर निकालने की गुहार लगाई है। बड़गाई से सात लोगों के साथ लाचुंग गई अंजु कुमारी ने भास्कर को फोटो और वीडियो भेजकर वहां के हालात से अवगत कराया। उन्होंने कहा-मैं परिवार और दोस्तों के साथ 29 मई से लाचुंग में फंसी हूं। मेरे साथ मेरी दो बेटी श्रुति व एंजेल और भांजी श्रुति है। साथ में बड़गाई की ही निभा कुमारी अपनी भतीजी भूमि भगत और डोरंडा की पुष्पांजलि गाड़ी भी हैं। हम सभी होटल पेमगेंग में हैं। यहां गोड्डा से आए सीनियर सिटीजन ग्रुप में भी नौ लोग फंसे हैं। ऐसे पांच-छह ग्रुप यहां आसपास के होटल में हैं। अंजू ने कहा कि उन्हें हृदय रोग है, लेकिन दवा नहीं मिल पा रही है, क्योंकि आसपास दवा की दुकान ही नहीं है। आर्मी वालों की मदद से कुछ भोजन मिल रहा है। कल क्या होगा, कुछ नहीं कहा जा सकता। लाचुंग में जहां वे लोग फंसे हैं, वहां आसपास में हेलीपैड है। सरकार हेलीकॉप्टर से उनका रेस्क्यू कर सकती है। लाचुंग में चार पुल-पुलिया टूटे, बाहर जाने का रास्ता नहीं आसपास दुकानें भी नहीं, डेढ़ किमी से ज्यादा जा नहीं सकते हमलोग होटल के पास डेढ़ किलोमीटर तक ही आना-जाना कर सकते हैं। अंजू ने बताया कि सुबह का नाश्ता होटल में उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। 31 मई की दोपहर में भी खाना नहीं मिला। फिर पास में स्थित आर्मी कैंप से हमने गुहार लगाई तो वहां से रात के खाने की व्यवस्था हुई। आज किसी तरह से होटल वाले ने आर्मी की मदद से चावल-दाल और सब्जी परोसा है। पास में एक ही दुकान है, जिसमें बिस्कुट तक नहीं मिल रहा है। 30 मई से फंसे हैं, गंगटोक जाने का रास्ता भी है बंद अंजू ने बताया कि लाचुंग का तापमान 10 डिग्री है। 30 मई को वे लोग योंगठांग वैली जीरो प्वाइंट पर घूमने गए थे। दोपहर तीन बजे लाचुंग लौटे। कुछ देर बाद पता चला कि भूस्खलन हुआ है। बारिश भी तेज हो रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि आसपास के सभी पुल-पुलिया टूट चुके हैं। लाचुंग को गंगटोक से जोड़ने वाला बड़ा पुल भी टूट गया है।


