झारखंड में इन संस्थानों की डिग्री मान्य नहीं… जेईपीसी ने डीईओ को इन्हें हटाने का दिया निर्देश गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों की डिग्री पर नौकरी लेने वाले झारखंड के करीब 1700 से अधिक सहायक अध्यापक (पारा शिक्षक) हटाए जाएंगे। ये सभी शैक्षणिक संस्थान उत्तर प्रदेश के हैं, जिनकी डिग्री झारखंड में मान्य नहीं है। शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच में इसका खुलासा हुआ है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) ने जिला शिक्षा अधीक्षकों को इन्हें नौकरी से हटाने का निर्देश दिया गया है। तत्काल कार्रवाई कर इसकी सूचना देने को कहा है, वरना शिक्षा अधिकारियों पर ही कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। जेईपीसी ने सभी सहायक अध्यापकों के प्रमाण पत्रों की जांच कराई है। इस दौरान पता चला कि करीब 1700 पारा शिक्षकों ने गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों से डिग्री ली है। इसी बीच जेईपीसी के निदेशक शशि रंजन ने कहा कि कोडरमा में कुछ पारा शिक्षकों को हटाया गया है। प्रमाण पत्रों की जांच में ऐसे करीब 1700 शिक्षक मिले हैं। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद इनकी संख्या बढ़ भी सकती है। अचानक इनकी डिग्री फर्जी कैसे हो गई : संजय दुबे झारखंड राज्य सहायक अध्यापक संघ के अध्यक्ष संजय दुबे ने जेईपीसी के फैसले पर ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा-जेईपीसी 20 साल से सो रही थी क्या? अब नींद कैसे खुली। करीब 2500 शिक्षकों को हटाने की बात हो रही है। ये सभी 20 साल या इससे अधिक समय से कार्यरत हैं। नियुक्ति के समय इनकी डिग्री सही थी, तभी तो नियुक्ति हुई। फिर अचानक डिग्री फर्जी कैसे हो गई। जेईपीसी ने मांगी रिपोर्ट अब तक ऐसे कितने शिक्षक हटाए गए…? जेईपीसी के निदेशक शशि रंजन ने जिला शिक्षा अधीक्षकों से पूछा है कि फर्जी और गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों की डिग्री से नौकरी लेने वाले कितने सहायक अध्यापकों को सेवामुक्त किया गया है। जिला शिक्षा अधीक्षक या प्रखंड प्रसार पदाधिकारियों ने ऐसे कितने सहायक अध्यापकों को पत्र भेजा है कि अब वे काम नहीं कर सकते। ऐसे प्रमाण पत्र वाले कितने शिक्षकों की सेवा समाप्त करने के लिए प्रशासनिक सह अनुशासनिक प्राधिकार को कार्रवाई के लिए लिखा गया है। उन्होंने इस संबंध में सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी है। हकीकत : शिक्षा विभाग इन्हें सीधे नहीं हटा सकता, सिर्फ अनुशंसा कर सकता है इन शिक्षकों को हटाने का निर्देश तो जारी कर दिया गया, लेकिन शिक्षा विभाग उन्हें सीधे नहीं हटा सकता। इन शिक्षकों की नियुक्ति ग्राम सभा ने की है। पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर प्रशासनिक सह अनुशासनिक प्राधिकार बनाया गया है, जो इन शिक्षकों को नौकरी से हटा सकता है। डीएसई और प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी इसकी अनुशंसा प्राधिकार को कर सकते हैं। निदेशक ने कहा- फर्जी संस्थानों की डिग्री वाले ऐसे अध्यापकों को हटाना ही होगा जेईपीसी के निदेशक शशि रंजन ने कहा कि फर्जी संस्थानों की डिग्री पर नौकरी लेने वाले सहायक अध्यापकों को हटाना ही होगा। शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच के क्रम में जिनके नाम सामने आए हैं, उनका नाम अनुशासनिक प्राधिकार को भेजा जा रहा है। कोडरमा समेत कुछ जिलों में इन्हें हटाया भी गया है, जबकि कुछ जिलों ने अभी फाइनल रिपोर्ट नहीं भेजी है। 1. प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद 2. भारतीय शिक्षा परिषद, यूपी 3. राजकीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश 4. हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग 5. हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद


