रांची प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झामुमो महासचिव द्वारा बाबूलाल मरांडी पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने रविवार को कहा कि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नगड़ी के आदिवासियों के हक में आवाज उठाई, तो झामुमो को मिर्ची लग गई। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह सरकार खुद को आदिवासियों की सरकार होने का दावा करती है, लेकिन जबरन आदिवासियों से उनकी जमीन छीन कर रिम्स टू बनाना चाहती है। ग्रामीणों ने बाबूलाल मरांडी को दस्तावेज दिखाए थे, उससे यह स्पष्ट हो गया था कि इस जमीन का अधिग्रहण कभी नहीं हुआ। ऐसे भी भूमि अधिग्रहण 2013 की धारा 101 कहती है कि अगर 5 वर्षों तक जिस प्रयोजन के लिए जमीन का अधिग्रहण हुआ, उसमें उसका प्रयोग नहीं हुआ, तो वह मूल रैयत को वापस हो जाएगी। आदिवासियों के विरोध के बावजूद लाठी-डंडे के जोर पर निर्माण का कड़ा विरोध करेगी पार्टी : प्रतुल शाहदेव ने कहा कि आदिवासियों के विरोध के बाद भी स्वास्थ्य मंत्री कह रहे हैं कि रिम्स टू वहीं बनेगा। लाठी-डंडे के जोर पर किसी भी निर्माण का पार्टी कड़ा विरोध करेगी। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सत्ताधारी गठबंधन में कांग्रेस एक प्रमुख सहयोगी है, जिसके कार्यकाल में अनुमान के अनुसार 6 करोड़ से लोग ज्यादा विस्थापित हुए। झारखंड की बात करें तो मसानजोर डैम, पंचेत डैम, मैथन डैम, तिलैया डैम, तेनुघाट डैम, बोकारो स्टील प्लांट, एचईसी आदि बड़े-बड़े प्रोजेक्ट के कारण कई लाख लोग विस्थापित हुए। लेकिन, झामुमो और कांग्रेस इन विस्थापितों को आज तक अपना हक नहीं दिला पाई। बाबूलाल मरांडी बताएं कि 104 एमओयू का आज क्या हुआ ? सुप्रियो भट्टाचार्य ने पूछा कि वर्ष 2003 से वर्ष 2006 तक भाजपा के कार्यकाल में 104 एमओयू हुए थे। आज उसका क्या हाल है, बाबूलाल मरांडी बताएं? उन्होंने कहा कि अभी तक अंतिम रूप से यह तय नहीं है कि रिम्स टू कहां बनेगा और ये लगे विरोध करने लगे। राज्य को रिंग रोड के आसपास सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जरूरत है, इस पर इनको तकलीफ क्यों हो रही है? झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 के निर्माण का विरोध करने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मरांडी अपने एक मित्र सुनील साहू के हितों की रक्षा के लिए रिम्स टू का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने रविवार को पार्टी के कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि मरांडी को न तो विकास विरोधी कहूंगा और न ही आदिवासी-मूलवासियों का हितैषी। वे किसी और एजेंडे के तहत रिम्स टू का विरोध कर रहे हैं। सुप्रियो ने कहा कि आज बाबूलाल मरांडी का इतना हृदय परिवर्तन और आदिवासियों के प्रति संवेदना जाग गई है। अपने शासनकाल में कोयल कारो परियोजना और नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की स्थापना होनी थी। ये वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने इसकी हरी झंडी दी थी। उस समय विपक्ष ने जब आंदोलन किया, तो मरांडी ने गोलियां चलवाई थीं। सैकड़ों लोगों को जेल भेजवा दिया था। झामुमो महासचिव ने कहा कि बाबूलाल मरांडी का असली चरित्र यही है। जब झारखंड राज्य बना, तो इस राज्य की बुनियाद में दीमक जिस व्यक्ति ने लगाया था, वह मरांडी ही थे।


