महेश्वर के नर्मदा नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध तेली भटियाण आश्रम के संत सियाराम बाबा के निधन के लगभग एक वर्ष बाद आश्रम की पुरानी चहल-पहल काफी कम हो गई है। हनुमान जी के परम भक्त बाबा के जाने के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट आई है, जिसका सीधा असर स्थानीय कारोबारियों और नाविकों की आजीविका पर पड़ा है। आश्रम के पास के दुकानदार भोलूसिंह सेंगर ने बताया कि पहले प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर केवल 100 से 200 रह गई है। स्थानीय दुकानदार सदाम खान सहित अन्य कारोबारियों ने भी बताया कि भक्तों की संख्या में कमी आई है, जिससे कई दुकानें बंद हो गई हैं और शेष पर सन्नाटा पसरा है। भट्यान निवासी नाविक शंकर केवट ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि पहले उनकी नाव के 40 से 50 चक्कर लगते थे, लेकिन अब कमाई आधी से भी कम रह गई है। एक लंगोट में बीता दिया पूरा जीवन 10 रु. से ज्यादा का दान नहीं लिया सियाराम बाबा का जीवन वैराग्य और समर्पण का प्रतीक रहा। उन्होंने 93 वर्ष की उम्र तक केवल एक लंगोट में रहकर जीवन बिताया। भीषण ठंड, बारिश या गर्मी हो, उन्होंने कभी तन को किसी अन्य वस्त्र से नहीं ढका। आज जहां कई साधु-संत लाखों-करोड़ों का दान सहज स्वीकार कर लेते हैं, वहीं सियाराम बाबा ने कभी भी ₹10 से अधिक का दान नहीं लिया। यह छोटी राशि भी उन्होंने क्षेत्र के मंदिरों के निर्माण कार्यों में लगा दी। 70% घटी भक्तों की संख्या, व्यापार में भी 75% की कमी बाबा के जीवित रहते देशभर से लोग उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए तेली भट्याण आश्रम पहुंचते थे। आश्रम में पाव रखने की जगह नहीं मिलती थी और दिनभर चहल-पहल रहती थी। भक्तों की संख्या बाबा के निधन के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में 70 फीसदी तक की भारी गिरावट आई है। आश्रम अब सुना-सुना रहता है, जहां हर तरफ सन्नाटा पसरा रहता है। बाबा के निधन के बाद प्रमुख व्यवस्थाएं बंद दुकानदार ने बताया कि भक्तों की संख्या घटने का मुख्य कारण बाबा के समय चलने वाली कुछ प्रमुख व्यवस्थाओं का बंद होना भी है। चाय, पानी, बिस्किट प्रसादी और परिक्रमा वासियों के लिए पूजन सामग्री वितरण की व्यवस्थाएं अब बंद हो गई हैं। हालांकि, परिक्रमा वासियों के लिए भोजन व्यवस्था अभी भी चालू है। संत सियाराम बाबा ट्रस्ट उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने में जुटा है। बाबा की पुण्यतिथि के अवसर पर 1 दिसंबर, 2025 को मोक्ष एकादशी के दिन उनकी भव्य मूर्ति का अनावरण किया जाएगा। देखिए तस्वीरें…. ट्रस्ट के सदस्य डॉ. हरि बिरला ने जानकारी दी कि जयपुर, राजस्थान से 8.5 लाख रुपए की लागत से 5 फीट की संगमरमर की मूर्ति बनवाई गई है। इस मूर्ति में बाबा रामायण पढ़ते हुए अपनी चिर-परिचित मुद्रा में दर्शाए गए हैं। आश्रम में मंदिर और घाट निर्माण सहित कुल 40 लाख रुपए के निर्माण कार्य जारी हैं। इन कार्यों का वित्तपोषण बाबा द्वारा छोड़ी गई राशि और भक्तों के सहयोग से किया जा रहा है। सियाराम बाबा के निधन के बाद किसी को उनका उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है। आश्रम संचालन में बदलाव बाबा के बाद कोई उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया है। ट्रस्ट ही आश्रम का संचालन संभाल रहा है। अखंड रामायण पाठ और बाबा की ज्योत पहले की तरह जल रही है। अब प्रसाद भक्त स्वयं लेते हैं। दान पेटी पर 10 रुपए से अधिक दान न करने का निर्देश लिखा है, पर श्रद्धालु स्वेच्छा से अधिक राशि जमा कर देते हैं। ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा तेली भटियाण गांव का नाम संत सियाराम बाबा के नाम पर रखने की की गई घोषणा को जल्द लागू करने की अपील की है।


