महासमुंद| तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव की समापन संध्या संस्कृति और साधना के अनुपम संगम में सराबोर रही। ऐतिहासिक सिरपुर की पावन धरती पर जैसे ही मंच से कथक की मधुर थाप गूंजी आैर पूरा वातावरण मंत्रमुग्ध हो उठा। युवा कथक नृत्यांगना इशिका गिरी की सशक्त और भावप्रवण प्रस्तुति ने मंच पर आते ही उनके आत्मविश्वास, गरिमा और शालीनता ने दर्शकों को बांध लिया। आंखों की प्रभावशाली भाषा, पैरों की सधी हुई थाप और भावों की सहज अभिव्यक्ति ने कथक की आत्मा को जीवंत कर दिया। करीब 15 मिनट तक चली प्रस्तुति में हर चक्कर और हर ताल में वर्षों की कठोर साधना स्पष्ट झलकती रही। शास्त्रीय संगीत की लय पर उनके संतुलित आंदोलनों ने माहौल को भावनात्मक के साथ आध्यात्मिक ऊंचाई भी दी। प्रस्तुति के समापन पर पूरा परिसर तालियों की गूंज से भर उठा और दर्शकों ने खड़े होकर कलाकार का उत्साहवर्धन किया। रायपुर में जन्मी इशिका गिरी सात वर्ष की आयु से कथक का अभ्यास कर रही हैं और वर्तमान में कमला देवी संगीत महाविद्यालय, रायपुर में गुरु डॉ. आरती सिंह से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।


