तमिलनाडु की 44 पेज की जांच रिपोर्ट में खुलासा, यही सिरप कई राज्यों में बिका सिरप बनाने वाली कंपनी में 39 तरह की गंभीर गड़बड़ियां छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के मामले की जांच अब कई परतें खोल रही है। तमिलनाडु सरकार की जांच में साफ हो गया है कि कफ सिरप में इस्तेमाल किया गया प्रोपीलीन ग्लाइकॉल फार्मा ग्रेड का नहीं था। यानी वह इंडस्ट्रियल ग्रेड का था- जो दवा निर्माण में प्रतिबंधित है। इंडस्ट्रियल ग्रेड प्रोपीलीन ग्लाइकॉल सस्ता तो पड़ता है, लेकिन इसमें डायएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) जैसे जहरीले रासायनिक तत्व मिल जाते हैं। यही तत्व शरीर में पहुंचने पर किडनी, लीवर और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं। बच्चों के मामले में ये असर जानलेवा हो सकता है। जिस सिरप से बच्चों की मौत हुई, उसमें 48% से अधिक डीईजी मिला था। आमतौर पर गैर फार्मा प्रोपीलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधन, प्लास्टिक, पेंट, गैर विषाक्त एंटी-फ्रीज में होता है। कोल्ड्रिफ सिरप बनाने वाली फर्म ‘श्रीसन फार्मास्यूटिकल ने इसे चोरी छिपे चेन्नई स्थित पार्क टाउन की सनराइज बायोटैक से खरीदा था। तमिलनाडु सरकार की 44 पेज की जांच रिपोर्ट ‘भास्कर’ के पास मौजूद है। इसमंे बताया गया है कि कंपनी के पास प्रोपीलीन ग्लाइकॉल की खरीदी का बैच नंबर नहीं था। कंपनी ने इस बात का परीक्षण तक नहीं किया कि प्रोपीलीन ग्लाइकॉल में में डीईजी/ईजी उपस्थित है या नहीं। फर्म ने चोरी-छिपे खरीदा था केमिकल प्रोपीलीन ग्लाइकॉल जहर जैसा… विशेषज्ञों के मुताबिक अगर सिरप में गैर-फार्मा ग्रेड प्रोपीलीन ग्लाइकॉल डाला गया तो यह सीधे दवा की सुरक्षा और प्रभावकारिता पर असर डालता है। बच्चों के लिए जहरीला हो सकता है। कच्चे माल की शुद्धता टेस्ट करनी जरूरी।


