राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सिरोही जिले में 100 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों का उद्देश्य सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्र निर्माण को बढ़ावा देना है, ताकि हिंदू समाज एकजुट हो सके और सामाजिक समरसता बढ़े। संघ के जिला प्रचार प्रमुख लोकेश कुमार ने बताया कि सिरोही जिले में ये सम्मेलन 18 जनवरी से 10 फरवरी तक आयोजित होंगे। इनमें 70 ग्रामीण मंडलों और 30 शहरी बस्तियों में कार्यक्रम शामिल हैं। प्रत्येक मंडल में पांच से सात गांवों को शामिल किया गया है। सिरोही जिला मुख्यालय की आठ बस्तियों में 18 जनवरी से आयोजन शुरू होंगे। इन सम्मेलनों के लिए आयोजन समितियों का गठन किया गया है, जो घर-घर जाकर लोगों को आमंत्रित कर रही हैं और इन्हें सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। लोकेश कुमार के अनुसार सिरोही में 8, शिवगंज में 12, सरूपगंज में 8, जावाल में 13, पिंडवाड़ा में 15, मंडार में 9, रेवदर में 10 और आबूरोड में 25 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। संघ के शताब्दी वर्ष के चरणबद्ध कार्यक्रम देशभर में चल रहे हैं। इन सम्मेलनों के माध्यम से हिंदू समाज में जागरूकता लाई जा रही है। जिले के प्रत्येक गांव, नगर और बस्ती में समिति के कार्यकर्ता सभी हिंदू परिवारों के घर जाकर सम्मेलन की जानकारी दे रहे हैं और उन्हें आमंत्रित कर रहे हैं। परिवारों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे अपने क्षेत्र में हो रहे इन सम्मेलनों में शामिल हों और सहभोज में भाग लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये हिंदू सम्मेलन समाज के कार्यक्रम हैं, जिनमें संतों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। उन्होने बताया कि सम्मेलन में युवाओं को जोड़ना, बस्तियों में संपर्क करना, मंदिरों में भजन कीर्तन, प्रभात फेरी, हनुमान चालीसा के सामूुहिक पाठ आदि के माध्यम से समाज को जोड़ने के लिए कार्यकर्ता कार्य कर रहे है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में मातृशक्ति की अच्छी सहभागिता हो उसके लिए मातृशक्तियां भी संपर्क कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में भारत माता पूजन, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ,संतों के प्रवचन, भजन, नृत्य, महापुरुषों की वेशभूषा और समरसता भोज जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे। संघ के पदाधिकारी, संत और समाज के लोग बड़ी संख्या में इस भव्य आयोजन में उपस्थित रहेंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदुओं के प्रति एकजुटता और संघ की शताब्दी वर्ष के आयोजित कार्यक्रम में पंच परिवर्तन, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व आधारित जीवन और नागरिक कर्तव्य बोध, जन जागरण के लिए चेतना जगाना है।


