भास्कर न्यूज|भरनो प्रखंड के दक्षिणी भरनो पंचायत अंतर्गत डायर जतरा टांड़ में राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा भारत एवं 21 पड़हा भरनो के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय सरना प्रार्थना सभा का विधिवत समापन किया गया।इस धार्मिक आयोजन में सात सरना के धार्मिक अगुवाओं के नेतृत्व में पूजा-अर्चना एवं प्रवचन कार्यक्रम संपन्न हुआ। सरना प्रार्थना सभा में सातों सरना क्षेत्र के अलावा आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में सरना धर्मावलंबियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के बतौर मुख्य अतिथि सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा उपस्थित रहे। उन्होंने धरम दिया जलाकर सरना धर्मावलंबियों को अपने पारंपरिक धर्म, संस्कृति और सभ्यता के प्रति जागरूक किया। प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने कहा कि आदिवासी समाज को सरना धर्म के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इस प्रकार के आयोजन किए जाते हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आधुनिक युग में युवा पीढ़ी अपनी पारंपरिक संस्कृति और धर्म से भटकती जा रही है, जिसे सही दिशा देने के लिए सरना प्रार्थना सभा का आयोजन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सिर सीता धाम, सरना स्थल व कुंडी स्थल की चर्चा करते हुए इसकी धार्मिक महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी। इस अवसर पर सरना धर्म राष्ट्रीय प्रचारिका चिंतामनी उरांव, कमले उरांव, मंगरा उरांव, संजय उरांव सहित अन्य वक्ताओं ने प्रवचन व भजन के माध्यम से सरना धर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला और समाज को संगठित रहने का संदेश दिया। वहीं पूर्व मुखिया सह आयोजन समिति के अध्यक्ष मुकेश उरांव ने उपस्थित धर्मावलंबियों को संबोधित करते हुए सरना धर्म कोड लागू करने की मांग को दोहराया। उन्होंने कहा कि रूढ़ि-प्रथा, स्वशासन, पड़हा व्यवस्था और ग्राम सभा को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। साथ ही पेशा कानून में सुधार, भाषा-संस्कृति, रीति-रिवाज, परंपरा, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, सार्वजनिक धरोहर जैसे सरना स्थल, मसना, अखाड़ा, देवी गुड़ी, जतरा टांड़ आदि पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ व खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने की अपील की। उन्होंने समाज से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, रोजगार के प्रति सजग रहने, युवाओं को नशापान से दूर रखने व अंधविश्वास, डायन-बिसाही, कुप्रथा और रोग खेदने जैसी प्रथाओं से मुक्ति के लिए जागरूक होने का आह्वान किया। प्रार्थना सभा के दौरान रात्रि जागरण, प्रवचन व भजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, वहीं श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का भी वितरण किया गया। इस मौके पर प्रमुख पारस नाथ उरांव, मुखिया मंजू देवी, रमेश उरांव, सुभानी उरांव, बिरसा उरांव, मनसा उरांव, जुगल उरांव, एतवा उरांव, लधूवा उरांव, तेतरा पहान, चरवा उरांव, बप्पी उरांव, सुरेश उरांव, शनिराम उरांव, सोमा उरांव, मेला उरांव, रघुवीर महली, शिव केशरी, रंजीत उरांव, अमित उरांव, सूरजमनी उरांव, धर्मेंद्र मुंडा, नगवा पहान, ललित उरांव, चंदर उरांव, सुकरमनी उरांव, झालो उरांव, सोमारी उरांव, चिमनी उरांव, लुथा उरांव, फूलकुमारी उरांव, रवि उरांव, गणेश उरांव, भूखा उरांव, चेंगो उरांव, मुन्नी उरांव, शांति उरांव, बबलू उरांव, विष्णु उरांव, आनंद उरांव, सनिया उरांव सहित सैकड़ों की संख्या में सरना धर्मावलंबी उपस्थित थे।


