भास्कर नॉलेज शहर के भोपालगंज क्षेत्र में आर्य समाज स्कूल भवन में बने आवासीय परिसर के किचन में शनिवार तड़के गैस सिलेंडर में रिसाव के बाद धमाके के कारण दीवारें गिर गई वहीं छत में भी दरारें आ गई। हादसे के समय कमरे में पति-प|ी और तीन बच्चे सो रहे थे, जो मलबे के बीच फंसने के बावजूद सुरक्षित बच गए। उन्हें मामूली चोटें आई। कमरे के दरवाजे, कुर्सियां और अन्य घरेलू सामान उछलकर करीब 50 फीट दूर जा गिरे। जानकारी के अनुसार भोपालगंज क्षेत्र में प्रताप टॉकीज के पास आर्य समाज के स्कूल भवन में तीसरी मंजिल पर बने बने आवासीय कमरे में प्रिंसिपल बालमुकुंद बिहारी परिवार सहित रहते हैं। शनिवार सुबह करीब 4.45 बजे किचन में रखे सिलेंडर में रिसाव के बाद धमाका हो गया। कमरे में प्रिंसिपल बालमुकुंद, उनकी प|ी हेमलता वर्मा और बच्चे आर्या (15), आर्यश्री (13) व आर्य निधि (7) गहरी नींद में थे। जोरदार धमाके से किचन और कमरे की दीवार ढह गई, जबकि अन्य दीवारों में दरारें आ गईं। इसके बाद छत का एक हिस्सा भी गिर पड़ा और सारा सामान मलबे में दब गया। पड़ोस में रहने वाली महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष रेखा हिरण ने बताया कि सुबह करीब 4.45 बजे तेज धमाके की आवाज आई। बच्चियों के बिस्तर पर भी छोटे-बड़े पत्थर गिरे थे। खबर से सबक…यह हादसा बताता है कि घर में थोड़ी से चूक बड़ा खतरा ला सकती है। इसलिए किचन में पर्याप्त वेंटीलेशन, खिड़कियां रखें, ताकि गैस को बाहर निकलने की जगह मिले। गैस की गंध आते ही माचिस, चूल्हा या स्विच न चलाएं, तुरंत खिड़की-दरवाजे खोलें। बंद कमरों से बाहर निकलकर गैस एजेंसी या आपात सेवा को सूचना दें। गैस लीक के कारण ब्लास्ट से टूटी दीवार एवं बिखरा सामान। कमरे में जमा हो गई थी गैस प्रथम दृष्टया यह सिलेंडर ब्लास्ट जैसा लगा, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार प्रथम दृष्टया यह मामला एलपीजी गैस रिसाव से हुए फ्लैश फायर का है। कमरे में रखे दो सिलेंडर नहीं फटे। हादसे में सिलेंडर सुरक्षित पाए गए। एफएसएल टीम प्रभारी ने बताया कि एलपीजी सिलेंडर में भरी प्रोपेन-ब्यूटेन गैस दबाव में रहती है। एलपीजी गैस हवा से भारी होती है। ऊपर उड़ने के बजाय कमरे के फर्श के कोनों, बंद हिस्सों में इकट्ठा हो गई। बंद कमरा होने के कारण गैस की मात्रा तेजी से बढ़ती चली गई। जब हवा में गैस की मात्रा करीब 10% तक पहुंच जाती है तो वह अत्यंत विस्फोटक हो जाती है। इसे तकनीकी भाषा में एक्सप्लोसिव रेंज कहा जाता है। आशंका जताई जा रही है कि रेफ्रिजरेटर के 3-4 घंटे में नियमित ट्रिप होने के कारण ट्रिप होते ही गैस ने चिंगारी को विस्फोटक बना दिया।


