सिंगरौली जिले की चितरंगी तहसील में सिविल न्यायालय के संचालन की वर्षों पुरानी मांग को लेकर अधिवक्ता संघ ने सोमवार से क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। संघ के अध्यक्ष बी.पी. सिंह के नेतृत्व में यह आंदोलन तब शुरू हुआ जब भवन और स्टाफ सहित सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद राज्य शासन से बजट स्वीकृति नहीं मिल पाई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि चितरंगी जैसे बड़े और घनी आबादी वाले क्षेत्र में सिविल न्यायालय का होना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में यहां के लोगों को न्याय के लिए बैढ़न या अन्य दूरस्थ स्थानों तक जाने में काफी समय और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बी.पी. सिंह ने कहा, “चितरंगी की जनता को न्याय के लिए पंद्रहों-बीसों दिन तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। शासन को जल्द बजट स्वीकृत करना चाहिए, अन्यथा आंदोलन और उग्र होगा।” स्थानीय निवासियों के अनुसार, कृषि, भूमि विवाद, पारिवारिक मामलों और अन्य दीवानी कार्यों के लिए ग्रामीणों को कलेक्टर कार्यालय और बैढ़न न्यायालय के बीच भटकना पड़ता है। चितरंगी क्षेत्र की बढ़ती आबादी, खनन गतिविधियों के विस्तार और भूमि अधिग्रहण के बढ़ते मामलों को देखते हुए यहां सिविल न्यायालय की स्थापना की कवायद वर्षों पहले शुरू की गई थी। अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक सिविल न्यायालय का संचालन शुरू नहीं हो जाता, उनका क्रमिक अनशन जारी रहेगा। इस आंदोलन को स्थानीय व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। जिला प्रशासन ने इस मामले पर उच्चस्तरीय संवाद की बात कही है।


