शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन लगाने में जेडीए फेल साबित हो रहा है। जेडीए को 3 साल पहले शहर में 73 जगहों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाने थे, इनके लिए जगह भी चिह्नित कर ली थी। कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (ईओआई) के जरिए प्रपोजल भी मांग लिए गए थे। ये चार्जिंग स्टेशन रेवेन्यू शेयर मॉडल पर लगाने थे। इसके बावजूद भी जेडीए शहर में एक भी चार्जिंग स्टेशन नहीं लगा पाया है। चार्जिंग स्टेशन नहीं होने से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले लोग परेशान हैं, उन्हें घर पर ही वाहनों को चार्ज करना पड़ रहा है। इसमें समय अधिक लग रहा है। सॉकेट से चार्ज करने पर आग लगने का भी खतरा रहता है। वहीं, दूसरे राज्यों और शहरों से आने वाले वाहनों को चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। दूसरी ओर इलेक्ट्रिक वाहनों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। 5 साल में दुपहिया और चौपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में 44 गुना बढ़ोतरी हुई है। 5 साल पहले 2500 चौपहिया इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड थे, अब इन की संख्या बढ़कर 40 हजार पहुंच गई है। एप से जुड़ने थे चार्जिंग स्टेशन ताकि ऑनलाइन पेमेंट हो सके जेडीए ने शहर में जब चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई थी, तब करीब 4 हजार इलेक्ट्रिक कारें रजिस्टर्ड थीं। अब कारों की संख्या बढ़कर 40 हजार पहुंच गई है। पांच साल में इलेक्ट्रिक वाहनों का आंकड़ा 1 लाख 11 हजार को पार कर चुका है। वर्ष 2024 में 36 हजार इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीयन हुआ है, इसमें 20,432 कारें शामिल हैं। डीलर्स का कहना है कि चार्जिंग स्टेशन स्थापित होने पर इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होगी। चार्जिंग पॉइंट्स न होने की वजह से भी लोग इलेक्ट्रिक कारें खरीदने से कतराते हैं। इन जगहों पर स्थापित होने थे चार्जिंग स्टेशन “2 साल पहले शहर में इलेक्ट्रिक वाहनाें के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव बना था। जगह देखी गई थी, लेकिन इसके बाद कुछ नहीं हुआ। दाे साल से प्रस्ताव पर काेई चर्चा नहीं हुई। अभी चार्जिंग स्टेशन बनाने काे लेकर काेई पत्रावली नहीं चली है।”
-अजय गर्ग, चीफ इंजीनियर, जेडीए


