फैमिली कोर्ट की सख्ती:महिलाएं भी बच्चों की संरक्षक, उन्हें भत्ता मिले; कोर्ट की चेतावनी- नहीं तो जेल भेज देंगे

शहर की फैमिली कोर्ट के सख्त रवैए के चलते पति अपनी कामकाजी पत्नियों व बच्चों को अब हर महीने लाखों रुपए तक भरण-पोषण राशि देने लगे हैं। इससे पहले पति कोर्ट आदेश के बाद भी भरण-पोषण राशि देने में लापरवाही बरत रहे थे। अब फैमिली कोर्ट के जज पवन कुमार गर्ग सहित अन्य जजों ने भरण-पोषण मामलों में सख्ती बरती तो पति कोर्ट के आदेश की पालना करने लगे। फैमिली कोर्ट के ऐसे कई आदेश आए हैं, जिनमें पतियों को भरण-पोषण राशि चुकाने का निर्देश दिए हैं और नहीं देने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई व जेल भेजने की चेतावनी भी दी है। फैमिली कोर्ट ने कहा कि धारा 125 समाजवादी कानून का हिस्सा है। इसका उद्देश्य समाज में जरूरतमंद महिला की मदद करना है। हाईकोर्ट ने भी कहा है कि पत्नी यदि पति से अलग भी रह रही है तो भी उसे पति के समान ही जीवन स्तर मिलना चाहिए। इस स्थिति में भी पति को अपनी पत्नी को वैवाहिक स्तर का ही जीवन मुहैया कराना चाहिए। इनमें कई मामले ऐसे भी हैं, जिसमें पत्नियां कामकाजी हैं या वे आय प्राप्त कर रही हैं, फिर भी कोर्ट ने पतियों को भरण-पोषण राशि के निर्देश दिए हैं। भरण-पोषण भत्ता देने में देरी की तो 6 फीसदी ब्याज भी देने के लिए कोर्ट ने कहा इंटीरियर डिजायन इंस्टीट्यूट चला रही पत्नी को 1.90 लाख रुपए दिलवाए
जयपुर मेट्रो-प्रथम की फैमिली कोर्ट-1 के जज वीरेन्द्र कुमार जसूजा ने एक मामले में इंटीरियर डिजायन इंस्टीट्यूट संचालक की मासिक आय 9 लाख रुपए मानते हुए उसे पत्नी को हर महीने 1.90 लाख रुपए का भरण-पोषण भत्ता देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पति हर महीने की दस तारीख तक प्रार्थिया के बैंक खाते में राशि जमा करा दे और इसमें देरी होने पर 6 फीसदी वार्षिक ब्याज दे। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति, पत्नी व बेटे को हर माह 1.05 लाख रुपए दे
फैमिली कोर्ट-4 के जज पवन कुमार गर्ग ने एक मामले में सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति को निर्देश दिया है कि वह निजी कंपनी में कार्यरत पत्नी व दो साल के बेटे को हर महीने 1.05 लाख रुपए भरण-पोषण भत्ता दे। अधिवक्ता डीएस शेखावत ने बताया कि प्रार्थिया पत्नी की मासिक आय 60 हजार थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि बेटा अभिरक्षा में है और उसे पति के समान जीवन स्तर जीने का अधिकार है। पत्नी बैंक में कार्यरत, भरण-पोषण के लिए 60 हजार रुपए दिलवाए
पारिवारिक मामलों के अधिवक्ता सुनील शर्मा ने बताया कि जयपुर मेट्रो-प्रथम की कोर्ट ने ही गुड़गांव निवासी पति को निजी बैंक में कार्यरत पत्नी व बच्चों के भरण-पोषण के लिए हर माह 60 हजार भरण-पोषण राशि देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी की दैनिक जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाना पिता का दायित्व है। वहीं पति का दायित्व है कि वह अपनी पत्नी व बच्चों का भरण-पोषण करे। “पत्नी व बच्चों को भरण-पोषण तय करना पति के जीवन स्तर व पत्नी व बच्चों की जरूरतों पर निर्भर करता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि पति के शुद्ध वेतन की 25 फीसदी राशि उससे अलग रह रही पत्नी को मिलनी चाहिए। वहीं, सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पत्नी को भरण-पोषण राशि देना पति का नैतिक दायित्व बताया गया है।” – दीपक चौहान, आपराधिक व पारिवारिक मामलों के अधिवक्ता

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