भास्कर इनसाइट फर्जी असिस्टेंट कमांडेंट बनकर ट्रैफिक जवान पर रौब झाड़ने वाले माराफारी जोशी कॉलोनी निवासी अश्विनी ठाकुर को बीएस सिटी पुलिस ने बुधवार चास जेल भेज दिया है। इसके पास से अलग-अलग नाम से चार पहचान पत्र मिले हैं। इनमें संतोष कुमार नाम से सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट, राष्ट्रीय सुरक्षा गारद (एनएसजी) के फर्जी कार्ड में असीम कुमार सिंह, सीआरपीएफ का एक अन्य फर्जी पहचान पत्र की फोटो कॉपी मिली है, जिसमें इसका नाम संदीप कुमार है और इसके आधार कार्ड में अश्विनी कुमार ठाकुर नाम है। दरअसल नया मोड़ स्थित ट्रैफिक थाना के पास नियमित वाहन जांच के दौरान उसे बाइक (जेएच09एजी-7432) से गुजरने के समय पकड़ा गया। वह हेलमेट नहीं पहना था। उसे ट्रैफिक जवान एएसआई ओशो प्रदीप व अन्य ने रोका। आरोपी रुकते ही वर्दी उतरवाने की धमकी देने लगा। परिचय पूछा तो सीआरपीएफ का असिस्टेंट कमांडेंट बताया तथा वर्तमान में सुकमा छत्तीसगढ़ में पदस्थापित होने की बात कही। उसने मोबाइल में परिचय पत्र दिखाया, जिसमें उसका नाम संतोष कुमार रैंक-सहायक कमांडेंट आदि अंकित था। लेकिन परिचय पत्र में छपा व्यक्ति का चेहरा मेल नहीं हो रहा था। जांच की गई तो तीन अन्य आईडी भी मिले। फर्जी पुलिस के नाम पर पहले भी पकड़े गए हैं दो आरोपी, एक को दो बार पकड़ा पिछले पांच साल में फर्जी पुलिस कर्मी बनकर विभिन्न प्रकार की ठगी करने के आरोप में दो लोगों को पकड़ा गया था। इसमें एक व्यक्ति मो. असलम अंसारी को दो बार पकड़ा गया था। वर्ष 2021 में चास थाना का अधिकारी बनकर धनबाद वासेपुर निवासी मो. असलम ने चास थाना आए एक फरियादी से ठगी का प्रयास किया था। इसके ठीक दो साल बाद असलम हरला थाना क्षेत्र में फर्जी डीएसपी बनकर एक नाबालिग से शादी करने जा रहा था। 2024 में सेक्टर-12 पुलिस ने सीआईएसएफ डीआईजी का फर्जी बॉडीगार्ड बनकर ठगी के आरोपी बांका स्थित बौंसी निवासी राजेश रंजन झा ने की थी। हिरासत में आरोपी।


