सीएम ने ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को दिखाई हरी झंडी:8 मार्च तक छत्तीसगढ़ के गांव-कस्बों में जाएगा, बाल-विवाह खत्म करने लोगों को करेगा जागरुक

छत्तीसगढ़ में बाल विवाह को रोकने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने घर जशपुर से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रथ पर बाल विवाह के नुकसान और इसके खिलाफ संदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही लोग इसमें शपथ भी ले सकते हैं। यह रथ 8 मार्च तक राज्य के सभी गांवों और कस्बों में जाएगा। यह अभियान जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) की पहल है और भारत सरकार के 100 दिनों के बाल विवाह विरोधी अभियान के तहत चल रहा है। JRC के 250 से ज्यादा संगठन 450 जिलों में काम कर रहे हैं ताकि 2030 तक बाल विवाह खत्म किया जा सके और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। जागरूकता अभियान गांव-गांव तक पहुंचेगा रथ को इस तरह बनाया गया है कि यह दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों तक भी पहुंच सके। मुख्य सड़कों पर यह चारपहिया वाहन से जाएगा और कठिन रास्तों वाले दूरस्थ गांवों तक मोटरसाइकिल या साइकिल कारवां के जरिए संदेश पहुंचाया जाएगा। बालोद देश का पहला बाल विवाह मुक्त जिला मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बाल विवाह पहले ही काफी कम हो चुका है और बालोद जिला को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है। सरकार और स्थानीय संगठनों के प्रयास से राज्य में बाल विवाह पूरी तरह खत्म करने की दिशा में काम हो रहा है। सूरजपुर में 75 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित छत्तीसगढ़ की भूमिका देशभर में उदाहरण है। बालोद जिला देश का पहला बाल विवाह मुक्त जिला बन चुका है। सूरजपुर जिले ने 75 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया है। ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ का उद्देश्य यह संदेश राज्य के हर कोने तक पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ में 3,988 बाल विवाह रोके गए चाइल्ड मैरेज फ्री इंडिया के राष्ट्रीय समन्वयक बिधान चंद्र सिंह ने छत्तीसगढ़ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यहां की राजनीतिक इच्छाशक्ति और जमीनी काम पूरे देश के लिए मिसाल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में पूरे देश में लगभग 1,98,628 बाल विवाह रोके गए, जिनमें अकेले छत्तीसगढ़ में 3,988 रोके गए। रथ की यात्रा में पंचायत, जिला प्रशासन, बाल विवाह अधिकारी और अन्य सरकारी अधिकारी भी जुड़ेंगे। यह अभियान स्कूलों, ग्राम सभाओं, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पीड़ितों की कहानियों के जरिए संदेश फैलाएगा। यह भी जानें बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के अनुसार, जो भी बाल विवाह करेगा, बढ़ावा देगा या इसमें शामिल होगा, उस पर कानूनी कार्रवाई होगी।

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