कल्याण विभाग ने टीएसी (ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल) गठन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। सीएम हेमंत सोरेन अध्यक्ष और मंत्री चमरा लिंडा उपाध्यक्ष होंगे। कमेटी में 18 सदस्य होंगे। इनमें 15 एसटी (अनुसूचित जनजाति) विधायक रखे जाएंगे। 3 अनुसूचित जाति सदस्यों का मनोनयन होगा। भाजपा में सिर्फ बाबूलाल मरांडी और चंपाई सोरेन एसटी विधायक ही हैं, ऐसे में दोनों को सदस्य बनाने की संभावना है। 13 सदस्यों में झामुमो और कांग्रेस के विधायकों को जगह मिलेगी। स्टीफन मरांडी, दीपक बिरुआ, भूषण तिर्की, सुखराम उरांव, दशरथ गागराई, विकास मुंडा, नमन विक्सल कोनगाड़ी, राजेश कच्छप और सोनाराम सिंकू को कमेटी का फिर सदस्य बनाया जा सकता है। कल्याण विभाग के सचिव टीएसी के सचिव होंगे। प्रस्ताव की फाइल इसी हफ्ते सीएम को सौंपी जाएगी। -शेष पेज 11 पर राज्यपाल की सहमति नहीं ली गई, तो फिर विवाद की आशंका पिछली बार टीएसी के गठन पर राज्यपाल की सहमति नहीं ली गई थी। राज्य सरकार ने 2021 में नई टीएसी नियमावली बनाकर राज्यपाल से सहमति के विकल्प को खत्म कर दिया था। इसे लेकर काफी विवाद हुआ था। नतीजतन 22 जून 2021 को गठित टीएसी के किसी भी बैठक में भाजपा के एसटी विधायकों ने विरोध स्वरूप हिस्सा नहीं लिया था। पहले टीएसी के गठन की स्वीकृति के लिए राजभवन की मंजूरी आवश्यक थी। नई नियमावली में सदस्यों के मनोनयन और टीएसी गठन का अधिकार मुख्यमंत्री को दिया गया है। 2021 में राज्य सरकार ने राज्यपाल के अधिकारों में कर दी थी कटौती टीएसी नियमावली 2021 में राज्यपाल के अधिकार की कटौती कर सदस्यों के मनोनयन का अधिकार मुख्यमंत्री को दे दिया गया। तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए संविधान विशेषज्ञों से राय ली। राज्य सरकार द्वारा बनाई गई टीएसी नियमावली 2021 को उन्होंने असंवैधानिक करार दिया था। उन्होंने राज्य सरकार को पुनर्विचार करने की सलाह दी थी। राजभवन ने सरकार से कहा था कि राज्यपाल की शक्ति को जारी रखते हुए सदस्यों के मनोनयन का अधिकार रखा जाए। पेसा कानून पर चर्चा के लिए राज्य में टीएसी का गठन अनिवार्य है भाजपा राज्य में पेसा कानून लागू करने पर मुखर है। पार्टी के नेता इस विषय पर लगातार राज्य सरकार को घेर रहे हैं। पेसा कानून पर चर्चा के लिए टीएसी का गठन अनिवार्य है। ऐसे में सरकार चाहती है कि जल्द से जल्द टीएसी गठित कर ली जाए। नियमावली के अनुसार झारखंड में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और विकास के लिए राज्यपाल इस परिषद की सलाह ले सकेंगे।


