सीएस का निर्देश:बड़े जलाशयों पर गोताखोर होंगे तैनात, हर माह मिलेंगे 10 हजार रुपए

राज्य के बड़े जलाशयों पर गोताखोर तैनात होंगे। पंजीकृत पेशेवर मछुआरों को ट्रेनिंग देकर चिह्नित जलाशयों पर गोताखोर के रूप में तैनाती होगा। इन गोताखोरों को हर माह 10 हजार रुपए मानदेय मिलेगा। मंगलवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई आपदा प्रबंधन से जुड़ी राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में मुख्य सचिव अलका तिवारी ने राज्य में प्राकृतिक कारणों से होने वाली क्षति से निपटने के लिए आपदा राहत की त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि ससमय राहत और बचाव कार्य से हम प्राकृतिक आपदा की क्षति को न्यूनतम कर सकते हैं। बैठक में तय हुआ कि राज्य के चिह्नित जलाशयों पर बचाव उपकरणों से लैस गोताखोर की तैनाती की जाएगी। इसके लिए पंजीकृत पेशेवर मछुआरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। चयनित गोताखोरों को 10 हजार रुपए मानदेय दिया जाएगा। बैठक में गृह विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, होमगार्ड एवं अग्निशमन के डीजी अनिल पालटा, वित्त सचिव प्रशांत कुमार आदि मौजूद थे। आपदा घोषित करने के प्रस्ताव का किया गया अनुमोदन बैठक में विभिन्न दुर्घटना से मृतक के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान भुगतान के लिए 10 करोड़ की स्वीकृति दी गई। इससे स्थानीय आपदा, अतिवृष्टि से होनेवाली जान-माल की क्षति, सर्पदंश, खनन जनित आपदा, वज्रपात, रेडिएशन संबंधी आपदा, पानी में डूबने, भगदड़ एवं गैस रिसाव तथा सड़क दुर्घटना में मृत के परिजनों को सहायता राशि मिलेगी। बैठक में कहा गया कि इससे किसी भी आपदा के बाद जिले द्वारा राशि की मांग और उसकी स्वीकृति में लगने वाले समय से बचा जा सकता है। संबंधित जिले के डीसी इस राशि का परिस्थिति के अनुसार तत्काल उपयोग कर सकेंगे। वहीं, बैठक में राज्य में आंधी-तूफान तथा ग्रीष्म लहर (लू) से संभावित जानमाल की क्षति को देखते हुए राज्य की विशिष्ट स्थानीय आपदा के तहत आपदा घोषित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया। अग्निशमन वाहन खरीदने के प्रस्ताव को दी गई मंजूरी राज्य के विभिन्न शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की संकीर्ण गलियों में निर्मित मकानों-भवनों में आगजनी की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य के लिए 39 अग्निशामालयों के लिए अग्निशमन वाहन (मिनी वाटर टेंडर विद् मिस्ट टेक्नोलॉजी) खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। आपदा प्रबंधन विभाग वज्रपात और डूबने से होने वाली मौतों के हॉटस्पॉट को झारखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के सहयोग से चिह्नित करेगा। उसके बाद चिह्नित स्थानों, इलाके में इस संकट से निपटने की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में आपदा प्रबंधन सचिव ब्रजेश शर्मा समेत कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

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