सीकर जिले के उद्योग नगर और कोतवाली थाने में 2 मुकदमे कोर्ट इस्तगासे के जरिए दर्ज हुए हैं। सीकर उद्योग नगर थाने में युवक से शादी का वादा करके तलाक करवाने और सुसाइड के लिए उकसाने का मामला दर्ज हुआ है। वहीं, कोतवाली थाने में जमीन का कन्वर्जन करवाने के दौरान फर्जी तरीके से जमीन की रजिस्ट्री करवाने का मामला दर्ज हुआ है। उद्योग नगर थाने में दर्ज हुए मुकदमे के अनुसार परडोली बड़ी निवासी लक्ष्मीनारायण ने सीकर के रामलीला मैदान निवासी युवती के खिलाफ शादी करने का वादा कर मुकरने और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करवाया है। रिपोर्ट के अनुसार परिवादी लक्ष्मीनारायण का पोता सुनील कुमार सीकर में रानी शक्ति रोड पर किराए का मकान लेकर रहता था। सुनील ने युवती महक के कहने पर आत्महत्या कर ली। रिपोर्ट में लक्ष्मीनारायण ने बताया है कि सुनील ने सुसाइड करने से कुछ दिन पहले बताया था कि महक उससे शादी करना चाहती थी। उस युवती के कहने पर ही सुनील ने तलाक लिया था। फिर वो लड़की ब्लेकमेल करने लगी और एक जाति का ना होने पर शादी के लिए मना कर दिया। फिर वाे लड़की मोबाइल पर चैटिंग करके शादी का झूठा आश्वासन देती रही। लड़की बीच-बीच में उससे पैसे भी लेती रही और अंत में लड़की ने जाति का हवाला देकर मना करते हुए सुनील से सुसाइड करने के लिए कह दिया। मृतक सुनील के फोन में युवती के फोटो और रिकॉर्डिंग भी मौजूद हैं। पुलिस ने सुनवाई नहीं की तो इस्तगासे के जरिए मामला दर्ज करवाया गया। वहीं, दूसरे मामले में कोतवाली थाना पुलिस में एक महिला ने मृत पति के नाम की जमीन की धोखाधड़ी से रजिस्ट्री ट्रांसफर करवाने और वकील के साथ मिलकर फर्जी तरीके से नामांतरण कैंसिल करवाने का मामला दर्ज हुआ है। परिवादी हसीना बावरिया ने एडवोकेट राजेंद्र जाखड़ के जरिए कोर्ट इस्तगासे के माध्यम से कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है। परिवादी हसीना बावरिया ने रिपोर्ट में बताया है कि भू माफियाओं ने जमीन हड़पने के लिए कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल किया। कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज के अनुसार परिवादी हसीना बावरिया ने बताया कि उसके पति पन्नालाल बावरिया की मौत हो चुकी है। पन्नालाल ने 30 अप्रैल 2013 में खसरा नंबर 945/388 का कन्वर्जन करवाया था, उस दौरान आरोपी मदनलाल और बृजमोहन ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसी जमीन को फर्जी खसरा नंबर 963/388 बताकर 0.2 हैक्टेयर जमीन को रेजिडेंशियल बताकर बेचान कर दिया और इस बीच पन्नालाल की मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार मांगीलाल ने उसी जमीन को एक और फर्जी खसरा नंबर 964/388 बताकर खरीद लिया। दोनों ही रजिस्ट्री में अशोक कुमार और मोहन गवाह थे। 2020 में संबंधित जमीन का पन्नालाल के वारिसों के नाम नामांतरण खुला तो आरोपियों ने वकील श्रवण कुमार व ताराचंद यादव के साथ मिलकर नामांतरण कैंसिल का दावा कर दिया तथा पन्नालाल के वारिसों के बिना नोटिस तामिल करवा दिए। कोतवाली में इस्तगासे के जरिए दर्ज रिपोर्ट के अनुसार हसीना बावरिया का कहना है कि आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेज बनाकर असली जमीन के नकली कागजात बनाए और फिर नामांतरण के समय पन्नालाल के वारिसों को नोटिस तामील करवाने की बजाय दोनों पक्ष के वकील खड़े करके नामांतरण खारिज करवाने का काम किया। अब न्यायालय ने खसरा नंबर 963/388 और 964/388 को अस्तित्व में ना मानते हुए मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।


