सीधी जिले में प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां जिला पंचायत कार्यालय के ठीक सामने और कलेक्ट्रेट की बाउंड्री से सटे एक स्थान पर एक असहाय वृद्ध पिछले दो वर्षों से खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर है। यह वृद्ध न तो बोल सकता है और न ही सुन सकता है। उसके पैरों में गंभीर घाव भी हैं। प्रशासन की नाक के नीचे यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन अभी तक किसी अधिकारी ने उसकी सुध नहीं ली है। उसके पास रहने का कोई उचित इंतजाम, बिस्तर या भोजन का साधन नहीं है। यह वही स्थान है जहां हर मंगलवार को जनसुनवाई होती है। इस दौरान जिले के सभी बड़े अधिकारी, जिनमें कलेक्टर स्वरोचिस सोमवंशी, अपर कलेक्टर बी.पी. पांडे, एसडीएम और विभिन्न विभागों का अमला शामिल होता है, मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद दो साल से वहीं बनी झोपड़ीनुमा जगह में रह रहे इस वृद्ध पर किसी का ध्यान नहीं गया। स्थानीय निवासी शुभम शुक्ला ने बताया कि यह व्यक्ति कई सालों से इसी हालत में पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी अधिकारी, कर्मचारी या जनप्रतिनिधि ने उसकी मदद करने की कोशिश तक नहीं की। शिवसेना के जिला अध्यक्ष बेनाम सिंह बघेल ने भी प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीधी में रैन बसेरे के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध है, जहां ऐसे असहाय और वृद्ध व्यक्तियों को भोजन, चिकित्सा और रहने की सुविधा दी जा सकती है। उन्होंने सिविल सर्जन और सीएमएचओ की निष्क्रियता पर भी चिंता जताई। इस संबंध में जब नगरपालिका सीएमओ मिनी अग्रवाल से बात की गई, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने स्पष्ट किया कि शहरी क्षेत्र की व्यवस्थाएं नगरपालिका के अधीन आती हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे सीएमओ से बात कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे।


