सीवरेज का काम जारी, स्कूल और हेल्थ में भी होगी डेवलपमेंट : हलका इंचार्ज

भास्कर न्यूज | जालंधर शिक्षा और सेहत सुविधाओं से हलका शाहकोट आज भी पिछड़ा हुआ है। पिछले 6-7 साल में पंजाब में दो बार बाढ़ आई, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान भी शाहकोट को हुआ। बावजूद शाहकोट को कोई विशेष फंड नहीं दिया गया। पंजाब में आप सरकार के 3 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन 2022 विस. चुनाव में जो वादे किए गए थे, वे अब तक अधूरे हैं। शाहकोट से कांग्रेस के हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया ने अकाली दल के मजबूत स्तंभ रहे कोहाड़ परिवार को हराकर लगातार इस सीट पर अपनी मजबूती दिखाई है। चुनाव के दौरान आप की तरफ से हलका शाहकोट में एजुकेशन और सेहत सुविधाओं की कमी को पूरा करने का बड़ा वादा किया था। शाहकोट में लड़के-लड़कियों का बाहरवीं क्लास तक कोई भी स्कूल नहीं है। इसलिए बच्चों को शहर से काफी दूर दूसरे स्कूलों में जाना पड़ रहा है। दूसरी तरफ सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी एक बड़ा मुद्दा है क्योंकि एमरजेंसी में मरीजों को नकोदर या सिविल अस्पताल जालंधर रेफर करना पड़ता है। दूसरी तरफ शाहकोट और लोहियां में ट्रैफिक की बड़ी समस्या है। नशे और अवैध माइनिंग को लेकर शाहकोट हमेशा सुर्खियों में रहा है और अवैध माइनिंग पर आज तक कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया गया और आज भी हलके में अवैध माइनिंग जोरों पर है। आप के हलका इंचार्ज रत्न सिंह काकड़ कलां के देहांत के बाद परमिंदर सिंह पंडोरी को हलका इंचार्ज नियुक्त किया गया। हलका शाहकोट से कांग्रेसी विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय हलके में बड़े स्तर पर विकास कार्य हुए हैं, जिसके चलते विधानसभा चुनाव में उनकी बड़ी जीत हुई है। लेकिन जब से आम आदमी पार्टी सत्ता में आई है, सरकार ने कोई भी वादा पूरा नहीं किया। शाहकोट में एजुकेशन और सेहत सुविधाओं की बड़ी कमी है। हलके के अधीन पड़ते 3 बड़े ब्लॉक शाहकोट, लोहियां, मेहतपुर के अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं। इस कारण लोगों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है। शाहकोट के अस्पताल को अपग्रेड नहीं किया गया। शहर में लड़के और लड़कियों के लिए सिर्फ दसवीं तक स्कूल है, जबकि बाहरवीं तक कोई भी सरकारी स्कूल नहीं है। कांग्रेस सरकार में शुरू हुए प्रोजेक्ट आप सरकार में भी अधूरे हैं। बड़े स्तर पर माइनिंग चल रही है, नशे सरेआम बिक रहा है। स्कूलों में टीचर्स की कमी है, 100 साल से ज्यादा पुराने सरकारी हाई स्कूल में एक भी अध्यापक पक्का नहीं है। स्कूल चलाने के लिए दूसरे स्कूलों से अध्यापक भेजने पड़ते हैं। .बीते वर्षों में दो बार बाढ़ आने से शाहकोट का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कोई स्पेशल ग्रांट नहीं मिली। .शाहकोट में 10वीं तक ही सरकारी स्कूल है, 12वीं के लिए दूर जाना पड़ता है। .सिविल अस्पताल में डॉक्टरों और मशीनों की कमी से मरीजों को जालंधर रेफर किया जाता है। .शाहकोट में सतलुज दरिया में माइनिंग आम होती है, जिसे पिछली सरकारों और मौजूदा सरकार में रोकना मुश्किल हो रहा है। . मेहतपुर और लोहियां के तंग बाजारों में कब्जों के चलते लगने वाला जाम, यहां पर फ्लाईओवर की जरूरत है। .शाहकोट में सतलुज दरिया पर अवैध शराब की तस्करी होती है, लाहन का काम बड़े स्तर पर चल रहा है।

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