सीसीटीवी नेटवर्क से बदली पुलिसिंग की तस्वीर…‎:46 ग्राम पंचायतें पूरी तरह कवर्ड, 13 महीनों में 7.40 करोड़ की चोरी… 80% रिकवरी

मध्यप्रदेश में अपराध नियंत्रण की दिशा में देवास जिला पुलिस का ऑपरेशन त्रिनेत्रम राज्य के लिए प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। जनसहयोग आधारित इस पहल से जिले में चोरी व लूट की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है, वहीं चोरी गए माल की बरामदगी 80% तक पहुंची है। पिछले 13 महीनों में 7.40 करोड़ रुपए के चोरी गए माल में से 5.90 करोड़ रुपए पुलिस ने बरामद किए। ऑपरेशन त्रिनेत्रम के तहत 3.80 करोड़ रुपए के जनसहयोग से जिले में 9,478 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें 46 ग्राम पंचायतें पूरी तरह सीसीटीवी कवर्ड हो चुकी हैं। पुलिस ने 2,608 चौपालें लगाकर 85,481 नागरिकों को सीसीटीवी के फायदे बताए। कैमरों की राशि जनता ने दी, जबकि स्थानों का चयन पुलिस ने सुरक्षा ऑडिट के आधार पर किया। डिजिटल पुलिसिंग के लिए 1,100 व्हाट्सएप कम्युनिटी ग्रुप बनाए गए, जिनसे 25 हजार डिजिटल पुलिस मित्र जुड़े। इसके चलते चेन स्नेचिंग की केवल 2 घटनाएं हुईं, दोनों ट्रेस की गईं। वाहन चोरी में 27% और साधारण चोरी में 22% की कमी आई। सीसीटीवी और डिजिटल नेटवर्क से कई बड़ी वारदातें सुलझीं। खातेगांव में बस से 27.50 लाख की चोरी 30 दिन में, टोंकखुर्द में 32.62 लाख की लूट 48 घंटे में, विजयागंज मंडी में व्यापारी से लूट 24 घंटे में, सोनकच्छ में 1.25 करोड़ की चोरी 24 घंटे में और औद्योगिक क्षेत्र में एसिड अटैक का खुलासा 48 घंटे में किया गया। वैज्ञानिक सुरक्षा ऑडिट से स्थान चयन : एसपी पुनीत गेहलोद के अनुसार ऑपरेशन त्रिनेत्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सीसीटीवी कैमरों का चयन स्थानीय सुरक्षा ऑडिट के आधार पर किया । महिलाओं-बच्चियों से छेड़छाड़ की संभावित जगहें, चोरी-नकबजनी के संवेदनशील क्षेत्र, बस स्टैंड, सराफा जैसे इलाकों को वैज्ञानिक ढंग से चिन्हित किया गया।

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