सुंदरकांड पाठ में सुनाया माता सीता के पतिव्रता धर्म का महत्व

भास्कर न्यूज | अमृतसर तिलक राज वालिया के सान्निध्य में रघुनाथ मंदिर विजय नगर में मकर संक्रांति पर सुंदरकांड पाठ करवाया। पवित्र ज्योति वालिया द्वारा मंदिर के प्रधान कमल, सचिव विवेक शर्मा, कोषाध्यक्ष अश्विनी शर्मा, सदस्य सुनील पांधी, पंकज सरीन, दविंदर बक्शी, विनीत शर्मा, डॉ. डीपी शर्मा, अश्विनी बाली, सुभाष खन्ना के साथ मिलकर जगाई। इस मौके पर वालिया ने फरमाया कि रावण की कैद में माता सीता राम नाम का निरंतर जाप करती रही। पति के ध्यान में बैठी रहती थी। सुंदरकांड पाठ में आया है कि सीता माता पति के ध्यान में बैठी हुई पति को संबोधित करती हैं। वह कहती हैं कि हे मेरे पतिदेव रावण ने मुझे 2 महीने की अवधि दी है सोचने को। आप अगर 2 महीने के बीच आ जाओ तो मुझे जिंदा पाओगे, लेकिन एक बात जान लिजिए कि मुझे विषपान भी क्यू न खाना पड़ें पर अपने पति व्रता धर्म पर अडिंग रहूंगी। समझो निश्चय से यह तो सती का सत्य पालुंगी। इस अवसर पर रजनीश गुप्ता, विनोद गुप्ता, हैप्पी कोछड, रजनी डोगरा, सीमा हांडा, तरलोचन बाला, हिना मरवाहा और दृष्टि ने सेवा निभाई।

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