रायपुर तहसील के मेसिया और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने सुकड़ी और लीलड़ी नदियों में बजरी खनन लीज रद्द करने की मांग की है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा आवंटित इस लीज को जनहित के खिलाफ बताया है। ग्रामीणों ने उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी को ज्ञापन सौंपकर कहा कि इस लीज से क्षेत्र का पर्यावरण, जलस्तर, कृषि और पशुपालन गंभीर संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों ने बताया कि सुकड़ी नदी के लीज क्षेत्र से तीन किलोमीटर दूर गिरी नंदा बांध और लीलड़ी नदी से करीब सात किलोमीटर दूर बाबरा बांध स्थित है। इस वर्ष लगभग 40 साल बाद दोनों बांध भरे हैं, जिससे नदियों में पानी आया है। हालांकि, नदियों में अभी तक नई बजरी का प्राकृतिक पुनर्भरण नहीं हुआ है। ग्रामीणों का तर्क है कि ऐसे में खनन शुरू होने से नदियों में बजरी का दोबारा भराव असंभव हो जाएगा। खेड़ा मामावास, मेसिया, ढागला, मोहराई, निमाज, आसरलाई, चांवडिया और हाजीवास सहित कई गांवों के कुओं का जलस्तर इन्हीं नदियों पर निर्भर करता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि बजरी खनन से कुएं सूख सकते हैं, जिससे खेती और पेयजल दोनों प्रभावित होंगे। यह क्षेत्र पहले से ही ‘ड्राई जोन’ घोषित है और अधिकांश भूमि चट्टानी होने के कारण पानी के स्रोत बेहद सीमित हैं। इसके अतिरिक्त नदियों में पाई जाने वाली ‘मुंज’ घास पशुपालन के लिए महत्वपूर्ण है। हजारों गायें, भेड़ और बकरियां इस घास पर निर्भर करती हैं। खनन गतिविधियों से इस घास के नष्ट होने पर पशुधन के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।


